माँ ………माँ… माँ….
माँ.. सृष्टी कीअ नमोल कृति है माँ,माँ कोई शब्द नहीं, जिसकी कोई व्याख्या कर सके
माँ कोई अर्थ नहीं जिसका कोई मतलब बता सके
माँ कोई रतन नहीं जिसका कोई मोल हों,
संगीत की सरगम की तरह माँ का हर एक स्वर मीठा है,
माँ एक एहसास है जिसकी…
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