जैन एकता मंच महिला प्रकोष्ठ द्वारा 16 मार्च से 3 अप्रैल तक बालक आदिकुमार और बालक वर्धमान पालना…
बाकानेर ! सभी को विदित है कि श्री 1008 भगवान ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर हैं। तीर्थंकर का अर्थ होता है जो तीर्थ की रचना करें। जो संसार सागर से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करें, वह तीर्थंकर कहलाते हैं। ऋषभदेव जी को आदिनाथ भी कहा…
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