बुंदेलखंड के प्रथमाचार्य विराग सिंधु गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी गुरुदेव का समाधि मरण
(जतारा महाराष्ट्र) ! भारत वर्ष की पावन भूमि सदैव नर रत्नों की जन्म दात्री रही है, जहाँ पर तीर्थंकरों, यतिवरो तथा महापुरुषों ने जन्म लेकर पुरुषार्थ द्वारा, त्याग, तपस्या के माध्यम से अपना आत्म कल्याण किया। इस श्रंखला में आचार्य श्री…
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