हर कोई तरुण सागर नहीं बन सकता! कटु प्रवचन और कटु भाषा में फर्क होता है… संत जब समाज को दिशा दे, तो…
इंदौर। साधु-संतों का जीवन आखिर किसलिए होता है? मोह-माया, निजी स्वार्थ और सांसारिक विवादों से ऊपर उठकर धर्म, आत्मचिंतन और समाज को सही दिशा देने के लिए। फिर सवाल यह है कि किसी संत को सार्वजनिक मंच से किसी व्यक्ति, वर्ग या पेशे को लेकर ऐसी…
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