संजय जैन ”अध्यक्ष ‘ विश्व जैन संगठन ‌जैन धर्म ,तीर्थ ,संस्कार ,संस्कृति की रक्षा हेतु आज रहे हैं गोमटगिरी तीर्थ क्षेत्र पर

 

इंदौर! ( देवपुरी वंदना )
अहिंसावाद के नाम पर क्या जैन समाज दूसरी समाज को प्रोत्साहन देती रहेगी । अगर कानूनी दृष्टि से देखें तो भी जैन समाज में कानून के ज्ञाता है। क्योंकि स्थानीय शासन प्रशासन द्वारा भी क्षेत्र सुरक्षा में आ रही बाधा को दूर किया जा सकता है।
मगर आपसी मनमुटाव हमारे समाज के तीर्थ क्षेत्र गोमटगिरी पर आज ऐसी स्थिति लेकर आ गया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद भी हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं । इसे हमारी उदासीनता कहे या अनदेखा क्योंकि हम आंख वह मुंह बंद कर हाथ पर हाथ रखा कर अब तमाशा देख रहे हैं क्यों ?कहा जाता है भारत धर्मनिरपेक्ष देश है फिर भी यहां पर धार्मिक स्थलों पर अपना वर्चस्व दिखा कर कब्जा किया जा रहा है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण श्री दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र गोमटगिरी से आप सभी परिचित हैं । स्थानीय जैन समाज को कई माह पूर्व से ही गुर्जर समाज की करतूतों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। मगर हम व हमारी समाज अहिंसा का पाठ पढ़ते हुए मौन धारण कर घर पर बैठे गई। जिसके फलस्वरूप न्यायालय द्वारा आऐ तीर्थ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए परिसीमन( बाउंड्री वॉल ) बनाने में भी हम कमजोर साबित हो रहे हैं क्योंकि अगर गुर्जर समाज को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है तो क्या राजनैति के क्षेत्र में इतने असफल है कि हम हमारे तीर्थ क्षेत्र को नहीं सुरक्षित कर पा रहे हैं।
आज ‌रविवार 7 मई को गोमटगिरी तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा इंदौर जैन समाज को गुर्जर समाज द्वारा किए जा रहे कब्जे के विरोध में सभी के सहयोग के लिए आमंत्रित किया है । एकता व संगठन के कार्य को एक दिशा व सही नेतृत्व के साथ ऊर्जा शक्ति लिए ‌ तीर्थराज सम्मेद शिखरजी के लिए पूरे विश्व में सबसे विश्वसनीय विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन अपनी सहभागिता निभाने इंदौर गोमटगिरी तीर्थ क्षेत्र पर आ रहे हैं
संजय जैन सर्वप्रथम इंदौर में विराजित मुनि श्री 108 आदित्य सागर जी का आशीर्वाद लेने एयरपोर्ट रोड के अंजनी नगर प्रातः पहुंचेंगे उसके बाद गोमटगिरी तीर्थ क्षेत्र पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
‌‌ इंदौर के स्थानीय जैन समाज से निवेदन है कि वह किसी आमंत्रण का इंतजार ना करते हुए अपने तीर्थ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए
अपने परिजनों परिचितों के साथ समय पर अवश्य आएं। और धर्म , समाज, संस्कार ,संस्कृति की सुरक्षा मैं अपना कर्तव्य निभाएं ।

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