प्राइवेट स्कूल के शिक्षक भी शिक्षक ही है – सम्मान उनका अधिकार, एहसान नहीं – कुमकुम जैन
मुरैना/द्रोणगिरी (मनोज जैन नायक)। आज के दौर में प्राइवेट शिक्षकों को लेकर समाज की सोच पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। क्या केवल इसलिए कि कोई शिक्षक प्राइवेट संस्था में पढ़ाता है, उसकी शिक्षा, मेहनत और काबिलियत कम हो जाती है?…
Read More...
Read More...
