आचार्य श्री 108 विनिश्चयसागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज की पावन स्मृति को समर्पित ‘विमलकीर्ति स्मृति-ग्रंथ’ के संपादक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न
मुरैना/गाजियाबाद। (देवपुरी वंदना) श्री 1008 पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, कविनगर, गाजियाबाद में वाक्केसरी आचार्य श्री 108 विनिश्चयसागर जी महाराज के ससंघ सान्निध्य में गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज की पावन स्मृति को समर्पित ‘विमलकीर्ति स्मृति-ग्रंथ’ के प्रकाशन एवं संपादन को लेकर संपादक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
बैठक में स्मृति-ग्रंथ की प्रस्तावित रूपरेखा, संपादकीय व्यवस्था, सामग्री संकलन, शोध परक लेखों के चयन तथा प्रकाशन से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। सभी सदस्यों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि स्मृति-ग्रंथ केवल श्रद्धांजलि-ग्रंथ न होकर एक प्रामाणिक, शोध परक, तथ्यपूर्ण एवं संग्रहणीय दस्तावेज के रूप में तैयार किया जाए। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि स्मृति-ग्रंथ में गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज के बहुआयामी व्यक्तित्व एवं कृतित्व को व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें उनके तप, साधना, त्याग, आध्यात्मिक चिंतन, साहित्यिक अवदान, धर्म एवं संस्कृति के संरक्षण, शिक्षा एवं संस्कार निर्माण, सामाजिक जागरण तथा राष्ट्रहित में किए गए कार्यों को प्रमाणिक सामग्री के साथ संकलित किया जाएगा।

विद्वानों को सौंपें गए दायित्व
स्मृति-ग्रंथ के संपादन हेतु विद्वानों को दायित्व सौंपे गए, बैठक में प्रधान संपादक :आदरणीय डॉ. श्रेयांश कुमार बड़ौत, संपादक डॉ. आशीष कुमार जैन, बम्होरी, संपादक मंडल से पं. श्री विनोद जैन रजवांस, डॉ. आशीष जैन आचार्य सागर, डॉ. सुनील जैन संचय, ललितपुर, डॉ. अल्पना अशोक मोदी जैन, ग्वालियर, पं. अनिल जैन शास्त्री, सागर अन्य विद्वान एवं सहयोगी सदस्य बैठक में उपस्थित रहे, विद्वानों ने स्मृति-ग्रंथ को उच्च स्तरीय एवं भावी पीढ़ियों के लिए उपयोगी बनाने हेतु अपने महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए। विशेष रूप से गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के आध्यात्मिक व्यक्तित्व, उनके तप एवं साधना, समाज के प्रति उनके मार्गदर्शन, साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान तथा जैन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनकी भूमिका को प्रमाणिक रूप से प्रस्तुत करने पर बल दिया गया। सदस्यों ने यह भी सुझाव दिया कि स्मृति-ग्रंथ में
गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज से संबंधित दुर्लभ संस्मरण, चित्र, पत्र, लेख, प्रवचन, साहित्यिक सामग्री तथा उनके जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी यथासंभव संकलित किया जाए, जिससे यह ग्रंथ उनके जीवन एवं अवदान का व्यापक संदर्भ-ग्रंथ बन सके।
विद्वानों का किया गया बहुमान
बैठक के अवसर पर चातुर्मास समिति की ओर से उपस्थित सभी विद्वानों एवं संपादक मंडल के सदस्यों का सम्मान किया गया। समिति ने स्मृति-ग्रंथ के इस महत्वपूर्ण कार्य में विद्वानों के सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
सभी सदस्यों ने संकल्प व्यक्त किया कि गणाचार्य श्री 108 विरागसागर जी महाराज की पावन स्मृति को अक्षुण्ण रखने तथा उनके प्रेरणादायी जीवन और अवदान को समाज एवं नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से ‘विमलकीर्ति स्मृति-ग्रंथ’ को उत्कृष्ट स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
यह स्मृति-ग्रंथ आने वाली पीढ़ियों के लिए गणाचार्य श्री विरागसागर जी महाराज के जीवन, साधना, साहित्य, विचार एवं समाजोपयोगी अवदान का एक महत्वपूर्ण एवं प्रमाणिक दस्तावेज सिद्ध होगा।


