तप, साधना और आराधना के पावन चातुर्मास पर्व में मुनि श्री 108 सुकुमाल सागर जी के समाधि मरण की अंतिम क्रिया विधि हेतु अपने फार्म हाउस की भूमि वैकल्पिक समय के लिए उपलब्ध कराकर पाटौदी परिवार ने पावन सेवा एवं पुण्यार्जन का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया।

24 वर्षों का संयम, 7 दिनों का निर्जल तप और नवकार महामंत्र का श्रवण करते हुए मुनि श्री सुकुमालसागर जी की उत्तम समाधि
इंदौर। (देवपुरी वंदना)परम पूज्य युगश्रेष्ठ तपस्वी सम्राट आचार्य श्री 108 सन्मति सागर जी महाराज से दीक्षित एवं चतुर्थ पट्टाधीश परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज की पावन छत्रछाया में विगत 24 वर्षों से संयम, तप एवं साधना के पथ पर निरंतर साधनारत मुनि श्री 108 सुकुमालसागर जी महाराज ने सोमवार, 31 अगस्त 2026 को अपने जीवन की अंतिम साधना पूर्ण की।

मुनि श्री विगत 7 दिनों से निर्जल उपवास करते हुए सल्लेखना समाधि की ओर अग्रसर थे। सोमवार सायं 6:30 बजे नेमीनगर जैन कॉलोनी, इंदौर में आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज के मुखारविंद से नवकार महामंत्र का श्रवण करते हुए उन्होंने अत्यंत शांत, निर्मल एवं पवित्र भावों के साथ उत्तम समाधि मरण को प्राप्त किया।
मुनि श्री की समाधि के पश्चात नेमीनगर जैन कॉलोनी से पाटौदी फार्म हाउस तक डोला निकाला गया, जिसमें समाज के अनेक गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु शामिल हुए। पाटौदी फार्म हाउस पर पंडित नितिन जी झंझरी के सहयोग से अंतिम क्रियाएं विधिपूर्वक संपन्न हुईं।

इस अवसर पर चातुर्मास संयोजक इंद्रकुमार जी सेठी वीणा सेठी, कैलाश जी लुहाड़िया, गिरीश पाटौदी, सामाजिक संसद अध्यक्ष आनंद गोधा, संजय पाटौदी, अशोक पाटौदी, महेश पाटौदी, प्रदीप जी बड़जात्या, कमल जी रावका, संदीप गंगवाल, प्रवीण जैन, सुयश बाकलीवाल, पवन जैन, संजय कासलीवाल, संजय जैन, विमल जी झंझरी, सुनील जैन, ईशान, प्रदीप गंगवाल सहित पाटौदी परिवार के राजेश पाटौदी, राजीव पाटौदी, आदित्य पाटौदी, देवेंद्र पाटौदी, नयन पाटोदी सहित अनेक समाजजन उपस्थित रहे।
संतों के लिए स्थायी समाधि स्थल की आवश्यकता
मुनि श्री की समाधि के अवसर पर आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज ने सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद गोधा एवं संजय पाटौदी से चर्चा करते हुए कहा कि इंदौर जैसे बड़े जैन समाज के लिए संतों की अंतिम क्रिया एवं समाधि के लिए एक स्थायी, सम्मानजनक एवं अधिकृत समाधि स्थल होना चाहिए।
आचार्य श्री ने समाजजनों से इस दिशा में शासन-प्रशासन से मांग करने तथा प्रशासन के सहयोग से उचित व्यवस्था बनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता के अनुसार समाज की ओर से चारों दिशाओं में अलग-अलग स्थानों की व्यवस्था पर भी विचार किया जा सकता है।
इस अवसर पर गिरीश जी पाटौदी ने समाज की ओर से महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि जब तक स्थायी एवं अधिकृत समाधि स्थल की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक पाटौदी फार्म हाउस जैन समाज के संतों की अंतिम क्रियाओं एवं समाधि के लिए समाज के लिए सदैव उपलब्ध रहेगा।
अशोक पाटौदी व महेश पाटोदी ने बताया कि पाटौदी फार्म हाउस समाधि स्थल पर संत की स्मृति एवं श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप छतरी का निर्माण कराया जाएगा तथा चरण भी स्थापित किए जाएंगे।

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