बनेड़ियाजी में 6 सितंबर को होगी खंडेलवाल दिगंबर जैन दंपति संगठन की प्रथम मिलन बैठक
इंदौर। ( देवपुरी वंदना) राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी) दिगंबर जैन संगठन द्वारा समाज को संगठित करने और परिवारों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक नई पहल की जा रही है। सरावगी खंडेलवाल दिगंबर जैन समाज के स्थापना दिवस 5 सितंबर के शुभ अवसर पर इंदौर दंपति संगठन की प्रथम मिलन बैठक 6 सितंबर, रविवार को अतिशय क्षेत्र बनेड़ियाजी में भगवान अजितनाथ के पावन दरबार में नमन-वंदन के साथ आयोजित की जाएगी।
आयोजकों के अनुसार इस पहल का उद्देश्य समाज के परिवारों को आपस में जोड़ना, युवा दंपतियों की सामाजिक सहभागिता बढ़ाना, पारिवारिक रिश्तों को और अधिक जीवंत बनाना तथा आने वाली पीढ़ी को समाज, संस्कार और परंपराओं से जोड़ना है। संगठन का मानना है कि परिवारों की एकजुटता ही समाज की मजबूती का आधार है।
प्रथम मिलन बैठक का कार्यक्रम
6 सितंबर, रविवार को प्रातः 7 बजे बस द्वारा प्रस्थान किया जाएगा। बनेड़ियाजी पहुंचने के बाद भगवान श्री 1008 अजितनाथ के दर्शन, अभिषेक एवं पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके पश्चात स्वल्पाहार एवं भोजन, दंपति संगठन की प्रथम मिलन बैठक तथा क्षेत्र में वृक्षारोपण का कार्यक्रम रखा गया है।
आयोजकों ने समाज के दंपतियों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान करते हुए कहा कि यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने की सामूहिक शुरुआत है।
संगठन का संदेश
राष्ट्रीय खंडेलवाल (सरावगी) दिगंबर जैन संगठन ने समाजबंधुओं से आह्वान किया है—“साथ चलें • साथ जुड़ें • साथ बढ़ें।” संगठन का उद्देश्य अधिक से अधिक परिवारों और युवा दंपतियों को जोड़कर सामाजिक रिश्तों को मजबूत करना है।
“आज हम जुड़ेंगे, कल हमारी आने वाली पीढ़ी हमसे जुड़ेगी।
हमारा परिवार • हमारा समाज • हमारी जिम्मेदारी।”
मार्गदर्शन एवं संरक्षण
परम संरक्षक: आर. के. जैन साहब, रानेका इंडस्ट्रीज
संरक्षक: अमित प्रदीप कुमार सिंह जी कासलीवाल, मनोज बाकलीवाल, कंचन बाग
मार्गदर्शक: मनोज काला
सदस्यता एवं संपर्क
संगठन से जुड़ने और सदस्यता संबंधी जानकारी के लिए
संपर्क करे :
संदीप–शीतल पहाड़िया —
9827027045 | 7987455476
देवेंद्र–अंजू सेठी — 9425052065
दीपक–ममता पाटनी — 9425400268
प्रफुल्ल–नीलम गोधा — 9425077578
राकेश–साधना टोंग्या — 9826050245
कपूर–प्रमिला पाटनी — 9827034890
राजकुमार–मनोरमा पाटनी — 9425322579
तपन–प्रीति बडजात्या — 9425081368
विपिन–दिव्या गंगवाल — 9425055110
मोनिका–पंकज अजमेरा — 9424874011
नीरज–प्रीति मोदी — 9425057297
पारस–ज्योति पाटोदी — 9039900909
इसके अतिरिक्त संदीप–दीपाली बज, श्वेता–हितेश काला, अजय–भावना रावका तथा जैनेन्द्र–संगीता सेठी से भी संगठन से जुड़ने के लिए संपर्क किया जा सकता है।
ऑनलाइन सदस्यता शुल्क एवं अन्य जानकारी हेतु: 7987455476
आयोजकों ने समाज के सभी परिवारों, विशेषकर युवा दंपतियों से अपील की है कि वे इस नई पहल का हिस्सा बनें और अपने परिवार एवं परिचित दंपतियों को भी संगठन से जोड़ें। वीर प्रभु के आशीर्वाद के साथ शुरू होने वाली यह पहल समाज में आपसी प्रेम, सहयोग और संगठन की भावना को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है !
दिगंबर जैन खंडेलवाल सरावगी समाज के सामाजिक एवं धार्मिक जीवन में कुलदेवी की परंपरा का विशेष स्थान रहा है। कुलदेवी को केवल आराधना का केंद्र नहीं, बल्कि वंश, परिवार और पीढ़ियों को जोड़ने वाली आस्था, संस्कार और परंपरा की प्रतीक शक्ति के रूप में देखा जाता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा समाज की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कुलदेवी : परिवार की आस्था का केंद्र
परंपरागत मान्यताओं के अनुसार कुलदेवी परिवार की आदि शक्ति और संरक्षक देवी मानी जाती हैं। किसी भी परिवार में नए कार्य का शुभारंभ, गृह प्रवेश, विवाह, संतान जन्म अथवा अन्य मांगलिक अवसरों पर कुलदेवी का स्मरण और पूजन करने की परंपरा रही है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि कुलदेवी की आराधना से परिवार को आध्यात्मिक संबल, सुख-शांति और मंगल की प्राप्ति होती है।
वंश और परिवार की रक्षा की आस्था
कुलदेवी को परिवार के लिए दैवीय संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में विश्वास रखने वाले परिवार मानते हैं कि कुलदेवी की कृपा से परिवार पर आने वाले संकटों और बाधाओं से रक्षा होती है। यही कारण है कि कुलदेवी के प्रति श्रद्धा केवल पूजा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पारिवारिक जीवन के संस्कारों में भी दिखाई देती है।
कुलदेवी से जुड़ता है परिवार और समाज
कुलदेवी की परंपरा का सामाजिक पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अनेक परिवारों की कुलदेवी का मंदिर उनके मूल निवास, पैतृक स्थान अथवा वंश की ऐतिहासिक भूमि से जुड़ा हुआ है। समय के साथ परिवार देश-विदेश के विभिन्न क्षेत्रों में बस गए, लेकिन कुलदेवी की आस्था ने उन्हें उनकी जड़ों से जोड़े रखा।
कुलदेवी के वार्षिक पूजन, धार्मिक आयोजन अथवा पारिवारिक उत्सव के अवसर पर दूर-दूर रहने वाले परिजन एक स्थान पर एकत्रित होते हैं। इससे पारिवारिक संबंधों में आत्मीयता बढ़ती है और नई पीढ़ी को अपने परिवार की परंपराओं एवं इतिहास से परिचित होने का अवसर मिलता है।
गोत्र, वंश और पहचान से जुड़ी परंपरा
खंडेलवाल सरावगी समाज में गोत्र और कुल परंपरा का अपना विशिष्ट महत्व है। कुलदेवी की परंपरा व्यक्ति को उसके वंश और पारिवारिक मूल से जोड़ने का माध्यम बनती है। यह केवल धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चले आ रहे संस्कारों, पारिवारिक स्मृतियों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का माध्यम भी है।
आज जब नई पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच अपनी जड़ों से दूर होती जा रही है, ऐसे समय में कुलदेवी की परंपरा हमें अपने मूल, वंश, संस्कार और पारिवारिक इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।
परंपरा का संरक्षण, नई पीढ़ी की जिम्मेदारी
कुलदेवी की आराधना का वास्तविक उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रहकर संस्कार, सदाचार, पारिवारिक एकता और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान को आगे बढ़ाना होना चाहिए। आवश्यकता है कि समाज के परिवार अपनी-अपनी कुलदेवी, कुल परंपरा और वंश इतिहास की जानकारी संकलित करें तथा नई पीढ़ी को उसके महत्व से परिचित कराएं।
कुलदेवी केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि हमारी जड़ों की पहचान हैं।
कुलदेवी की परंपरा केवल पूजा नहीं, पीढ़ियों को जोड़ने वाला संस्कार है।
और अपनी कुल परंपरा का संरक्षण—अपनी सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण है।


