मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी कॉलोनी राजधानी इंदौर शहर स्थित सुदामा नगर में 28 जुलाई 2026 को प्रातः 9:00 बजे आचार्य श्री 108 सिद्धांत सागर जी महाराज 10 पिच्छि संसघ चातुर्मास मंगल कलश स्थापना करेंगे

इंदौर ! (देवपुरी वंदना) चातुर्मास (जिसे वर्षा योग भी कहा जाता है) वर्षा ऋतु के चार महीनों (सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) जुलाई ,अगस्त, सितंबर, अक्टूबर ,नवंबर का पवित्र समय है, जिसमें सभी जैन साधु- साध्वियाँ एक ही स्थान पर स्थिरवास करते हैं चातुर्मास से उद्देश्य और महत्व: वर्षा ऋतु में जमीन पर असंख्य सूक्ष्म जीव और छोटे पौधे उत्पन्न हो जाते हैं जीवों की रक्षा (अहिंसा) और अपनी आत्मिक साधना के लिए संत गण विहार (यात्रा) रोककर एक निश्चित स्थान पर रुकते है यह समय तप, त्याग, साधना, आराधना, संयम और स्वाध्याय के लिए उत्तम माना जाता है अवधि: चातुर्मास का आरंभ प्रायः जुलाई – अगस्त में देवशयनी एकादशी या आषाढ़ पूर्णिमा से होता है और यह कार्तिक मास दीपावली तक चलता है श्रावक और श्राविका ओ के लिए: गृहस्थ जीवन वाले जैन अनुयायी इन चार महीनों में विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठान, उपवास, सामायिक और ध्यान करते है !
मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर शहर स्थित जैन पीछी और प्रतिमा धारी भैया जी, दीदी के ससंघ‌ चलते फिरते श्रमण परंपरा के रक्षार्थ गुरुवर आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी सुदामा नगर इंदौर में आगामी मंगलवार 28 जुलाई 2026 को प्रातः 9:00 बजे मंगल कलश स्थापना कर 8 नवंबर दीपावली तक 104 दिवसीय इंदौर ही नहीं निकटतम सभी प्रदेशों के श्रावकों -श्राविकाओ के साथ रिमझिम फुहार के साथ अपना मानवीय जीवन सफल करेंगे!
तपस्वी सम्राट आचार्य श्री108 सिद्धांत सागरजी महाराज सिद्धांत धाम बेला (एक परिचय)
आचार्य श्री 108 सिद्धांत सागरजी महाराज का जन्म 1 अप्रैल 1966को पटेरा, दमोह, मध्य प्रदेश में हुआ। आपके गृहस्थ अवस्था के माता-पिता श्रीमती फूलाबाई जैन और श्री उदय चंद जैन बड़कुल हैं। आचार्य श्री का अपना सांसारिक नाम महेश कुमार जैन से शुरू किया और आगे धर्म के मार्ग पर अग्रसर हुए। क्षुल्लक दीक्षा आचार्य श्री 108 सन्मति सागरजी महाराज के सानिध्य में संपन्न हुई। और मुनि दीक्षा 24 अक्टूबर 1987 को उदयपुर, राजस्थान में आचार्य श्री 108 सन्मति सागरजी महाराज (अंकलीकर) से प्राप्त की। इसके बाद, 8 फरवरी 1993 को उन्हें आचार्य पद प्रदान किया गया, जिसका स्थान ब्यावर, राजस्थान था। यह आचार्य पद गुरुदेव आचार्य श्री 108 सन्मति सागरजी महाराज द्वारा प्रदान किया गया।
आचार्य श्री 108 सिद्धांत सागर जी के ससघ में
मुनि श्री 108 सहज सागर जी महाराज
आर्यिका 105 सौरभ मति माता जी
गणिनी आर्यिका 105 सोहार्द मति माता जी
आर्यिका 105 संस्कार मति माता जी
आर्यिका 105 समर्थ मति माता जी
आर्यिका 105 सक्षम मति माता जी
आर्यिका 105 सिद्धार्थ मति माता
क्षुल्लक 105 सर्वेंद्र सागर जी महाराज
क्षुल्लिका 105 सर्वार्थ मति माताजी साथ में है
श्री 1008 आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर (सुदामा नगर) इंदौर ( मध्यप्रदेश ) के
(अध्यक्ष: चातुर्मास सेवा समिति) कमल रावका (मो.नं. 9425314595), विमल झा॑झरी महामंत्री, कोषाध्यक्ष निर्मल पाटनी, कार्यकारिणी साथी अशोक बंडी ,डॉ अनुपम जैन, शैलेश गदिया महिला मंडल अध्यक्ष मीना मोदी, महामंत्री ममता बड़जात्या, और युवा मंडल पीयूष रावका अध्यक्ष मंत्री विपिन पाटनी
प्रदीप बड़जात्या (पुलक जन चेतना मंच) के साथ संपूर्ण कार्यकारिणी और सुदामा नगर दिगंबर जैन समाज ने चातुर्मास के अवसर पर इंदौर दिगंबर जैन समाज से लाभ लेने का आव्हान करते हुए कहा कि इस शुभ पावन मंगल
समय का उपयोग करते हुए अपने मानवीय जीवन को आध्यात्मिक, शैक्षणिक, ज्ञानवर्धक, जानकारी से उपयुक्त बनाएं !

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