इंदौर दिगंबर जैन समाज को सशक्त संगठन और सही प्रतिनिधित्व के लिए व्यापक जनगणना की अत्यंत आवश्यकता है

इंदौर ! ( देवपुरी वंदना ) इंदौर दिगंबर जैन समाज में बड़े लंबे समय से धर्म ,समाज ,तीर्थ क्षेत्र, और प्राचीन जैन धरोहर , श्रमण संस्कृति की रक्षा – सुरक्षा में सहयोग की मांग शासन – प्रशासन से की जा रही है । जो कि अयोग्य साबित हो रही है । जिसके कारण अजैनियो की हठधर्मिता व कब्जा प्रवृत्ति की मनमानी के साथ-साथ स्थानीय से लेकर क्षेत्रीय व राष्ट्रीय स्तर का हिंदू के नाम पर अनैतिक, असंवैधानिक व गुंडा तत्व के सनातनी धार्मिक कम आपराधिक व्यक्तित्व को राजनैतिक संरक्षण जैन समाज के लिए अब कष्टदायक बनता जा रहा है ।
या खुले शब्दों में कहे तो जैन धर्म , समाज की प्राचीन धरोहर व पहचान पर अब तीव्रता से आघात होता जा रहा है ।शासन-प्रशासन हो या स्थानीय जनप्रतिनिधि के नुमाइंदे हो । वह तो सिर्फ वोट बैंक देखता है ना कि क्या सही क्या गलत उन्हें सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने या अपने पद को और ऊपर उठाने की लालसा रहती है । जिसके फलस्वरूप आज देश के जैन समाज के हृदय स्थल इंदौर शहर जहां पर जैन समाज के बाहुल्य क्षेत्र तो है ही साथ ही साथ एक समय पहले राजनैतिक क्षेत्र में भी जैन समाज का वर्चस्व स्थापित रहता था।
किंतु अब हमारे शूरवीरों मे बढ़ती नाम, पद , मंच, माला,की महत्वाकांक्षा के चलते व हमारे जैन समाज का विघटन हमारे मान सम्मान व प्रतिष्ठा की पहचान गोमटगिरी जैन तीर्थ क्षेत्र पर गुर्जर समाज के कुछ शरारती तत्वों द्वारा बिना किसी डर के पिछले कई वर्षों से स्वतंत्र धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र की गिनती में भी जैन समाज पर आघात कर रहे हैं ? इसे हमारी कमजोरी कहे या उदासीनता कहे खैर अब जो बीत गया सो बीत गया ।
जहां इंदौर शहर में पांच – पांच विधानसभा व 85 नगर निकाय के वार्डों मैं निवासरत जैन साधर्मी बंधु तो है ही साथ ही साथ इंदौर शहर सीमांकन में भी रह रहे हैं । इंदौर नगर निगम में 530 स्क्वायर किलोमीटर है
जिसमें जानकारी अनुसार दिगंबर जैन समाज के लगभग 215 मंदिरों की सूची तो तैयार है अभी नव निर्माण लगभग 20 से 25 और मंदिर के क्षेत्र में और भी जैन साधर्मी बंधु निवासरत है यूं देखा जाए तो इंदौर शहर में दिगंबर जैन समाज का नेतृत्व करने वाली पहले एक सामाजिक संसद होती थी इसके पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय प्रदीप सिंह जी कसलीवाल जी ने इंदौर ही नहीं लगभग सभी प्रांतो की अलग-अलग जनगणना का कार्य प्रारंभ किया था जिसमें बहुत सी सफलता भी हासिल हुई मगर विधि के विधान के अनुसार उचित व सही नेतृत्वकर्ता हमारे बीच से चले गए उसके बाद वह कार्य अधूरा सा रह गया !
मगर नाम, पद, की महत्वकांक्षा के चलते दो अन्य और सामाजिक संसद इंदौर हो गई जिसमें मुख्य अध्यक्ष के साथ साथ युवा पीढ़ी के भी नेतृत्व साथी विद्यमान तो है ही इसके अलावा जहां इंदौर शहर के जैन साधर्मी बंधु राष्ट्रीय स्तर का नेतृत्व करते हैं। जैसे श्री दिगंबर जैन महासमिति , श्री दिगंबर जैन महासभा, श्री दिगंबर जैन विद्वत परिषद, श्री दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, पुलक जन चेतना मंच, श्री दिगंबर जैन महिला परिषद, जैन राजनैतिक चेतना मंच, श्री दिगंबर जैन जागृति महिला परिषद, जैन पत्रकार महासंघ (महिला प्रकोष्ठ) ,श्री दिगंबर जैन महिला संगठन, व अलग-अलग समाज के संगठन जैसे : खंडेलवाल,पोरवाड़, हुमड परवार ,जैसवाल, खरोआ, बघेरवाल, पोरवाल, व अन्य – अन्य अगर इंदौर जैन समाज अब भी जैन जनगणना की ओर ध्यान नहीं देता है तो विगत इंदौर निकाय चुनाव में जैन बंधुओं को पराजय का सामना करना पड़ा क्योंकि जैन प्रतिनिधियों की अधूरी कार्य योजना रहती है
जिसमें यथा संभव जहां तक हमारे सूत्र व प्रतिनिधि उपलब्ध या संपर्क है वहां तक की जानकारी पूर्ण है मगर हम भी जहां तक नहीं पहुंच पाते
वहां स्थानीय समाज ही कार्य करता है ।
अब देखना यह है कि श्री दिगंबर जैन समाज इंदौर अपने शहर की विभिन्न कालोनियों मे निवासरत साधर्मी बंधुओं की जनगणना अब प्रकार करता है या कराता है क्योंकि अगर दिगंबर जैन समाज की जनगणना अभी भी नहीं होती है तो राजनैतिक क्षेत्र में जैन प्रतिनिधित्व के बारे में बात करना तो ठीक सोचना भी उचित नहीं होगा । यह आंकड़े तो सिर्फ श्री दिगंबर जैन समाज के ही हैं अगर इंदौर श्वेतांबर जैन समाज भी धर्म, समाज, राष्ट्र व तीर्थ क्षेत्र बचाओ मिशन में सहयोग करता है तो संपूर्ण देश के जैन समाज के लिए यह गर्व की बात होगी ।
