छत्रपति संभाजी नगर (महा.) में परम पूज्य आचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज का (19 पिछी ससंघ) का भव्य चातुर्मास हेतु भव्य ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ
छत्रपति संभाजीनगर, | (देवपुरी वंदना) परम पूज्य समाधिस्थ आचार्य श्री विरागसागर महाराज के परम प्रभावक शिष्य, आचार्य श्री 108 विनम्रसागर महाराज ससंघ (19 साधु एवं आर्यिका माताजी) का चातुर्मास हेतु आज प्रातः छत्रपति संभाजीनगर में भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल आगमन हुआ। राजाबाजार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में उनके पावन आगमन पर सकल दिगंबर जैन समाज ने अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में उनका भव्य स्वागत किया।

प्रातः 7:30 बजे युग प्रवर्तक आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, अरिहंत नगर से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। धर्मध्वज, नवकार महामंत्र के जयघोष, भजन-कीर्तन तथा हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में यह शोभायात्रा बालाजी नगर, मोंढा नाका, लक्ष्मण चौक, अभिनय थिएटर मार्ग, किराना चावड़ी होते हुए राजाबाजार स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुँची। संपूर्ण मार्ग में विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं तथा समाजबंधुओं ने पुष्पवर्षा, मंगल आरती और जयघोष के साथ आचार्य श्री का भावपूर्ण स्वागत किया।
आचार्य श्री विनम्रसागर महाराज के चातुर्मास आगमन से समूचे छत्रपति संभाजीनगर का वातावरण धर्ममय, भक्तिमय और उत्साहपूर्ण हो गया। अनेक वर्षों के बाद नगर को आचार्य ससंघ का चातुर्मास प्राप्त होने से समाज में आनंद, उत्साह और आध्यात्मिक जागृति का वातावरण निर्मित हुआ। महिला, पुरुष, युवा, युवतियाँ एवं बच्चों ने बड़ी संख्या में शोभायात्रा में सहभागिता कर गुरु भक्ति, अनुशासन और समाज की एकता का प्रेरणादायी परिचय दिया।
इस अवसर पर अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री विनम्रसागर महाराज ने कहा, “किसी भी अच्छे कार्य को कल पर मत टालिए। जो श्रेष्ठ कार्य करना है, उसे आज ही कीजिए। समय अमूल्य है, उसका सदुपयोग धर्म, आराधना और सेवा में करें।” उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर के समाज की गुरु भक्ति, समर्पण और संगठन भावना की सराहना करते हुए कहा, “यहाँ के समाज की गुरु भक्ति अत्यंत प्रेरणादायी है। आप सभी इसी भावना के साथ धर्मकार्य करते रहें तथा भगवान की आराधना, गुरु भक्ति और आत्मकल्याण के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ते रहें। यही जीवन का वास्तविक लाभ है।”
समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने बताया कि चातुर्मास केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मकल्याण, संयम, संस्कार, सामाजिक समरसता और धर्मप्रभावना का महापर्व है। आगामी चार महीनों में गुरुदेव के पावन सान्निध्य में प्रवचन, स्वाध्याय, तप, आराधना, संस्कार शिविर तथा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी को धर्म और संस्कृति से जुड़ने का अमूल्य अवसर प्राप्त होगा !
विनम्र चातुर्मास–2026 संयोजन समिति तथा सकल दिगंबर जैन समाज ने सभी श्रद्धालुओं, संस्थाओं एवं सहयोग करने वाले समाजबंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही सभी से चातुर्मास के विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया। छत्रपति संभाजीनगर के धार्मिक इतिहास में यह अवसर एक स्वर्णिम एवं अविस्मरणीय अध्याय के रूप में अंकित होगा। गुरुदेव के पावन सान्निध्य में आगामी चार महीनों का अधिकतम आध्यात्मिक लाभ लेने का संकल्प भी समाज ने व्यक्त किया।


