हमारे बोलने का लहजा, बोलने की टोन, और.. बात कहने का अन्दाज दायरे में होना चाहिए..! अंतर्मना आचार्य श्री108 प्रसन्न सागरजी महाराज

औरंगाबाद पुष्पगिरी सोनकच्छ। पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री108 पियूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी में वर्षायोग हेतु विराजमान हैं उनके सानिध्य में वहां विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हो रहें हैं उसी श्रुंखला में आज सुबह उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि। धरती पर आप अमीर हो सकते हैं, लेकिन अमर नहीं। अच्छी वाणी और व्यवहार से आप अमर हो सकते हैं। यदि वाणी, व्यवहार और बोलने का लहजा ठीक है तो, अन्यथः……बोलकर सोचना और सोचकर बोलना, इन दोनों को बोलने में व्यक्ति का व्यक्तित्व बदल सकता है।

अच्छी वाणी और बोलने के अन्दाज से आप किसी के दिल में उतर सकते हैं, और कर्कश वाणी, व्यवहार से आप दिल से उतर सकते हैं। मतलब की बात सब समझ लेते हैं, लेकिन बात का मतलब बहुत कम लोग समझ पाते हैं। इन्सान जब करवट लेता है तो दिशा बदल जाती है, और जब वक्त बदलता है तो दशा सुधर जाती है। सही वक्त ही बुरे वक्त का इलाज कर सकता है…!!! प्रचार प्रसार संयोजक ✍🏻
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद

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