मूलाधार चक्र पर विराजित हैं श्री गणेश
ओंकार जिसे ब्रह्मनाद भी कहा जाता है, ओंकार से जो ध्वनि निकलती है उसी से परमात्मा की सृष्टि की रचना हुई । हमारी संस्कृति के अनुसार आज भी लोग सुबह और शाम वातावरण को पवित्र व पावन करने हेतु शंखनाद करते हैं। आज जिस विकट परिस्थितियों में हम…
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