आपके भाव ही आपके भविष्य का निर्माण करते है -आचार्य श्री 108 विमर्शसागरजी
एटा ! (मनोज नायक) जैन धर्मानुयायी के आदर्श तीर्थंकर भगवान हुआ करते हैं । तीर्थंकर भगवान के महामात्य से जहां उनका समवशरण विराजमान होता है वहां चारों ओर सौ सौ योजन अर्थात 1200 किलोमीटर तक सुभिक्ष हो जाता है अर्थात चारों ओर का वातावरण सुख…
Read More...
Read More...
