पुणे में गृद्धपिच्छाचार्य आचार्य श्री 108 उमास्वामी द्विशताब्दी महोत्सव एवं तत्त्वार्थसूत्र वर्ष के अंतर्गत राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी संपन्न

पुणे। ( देवपुरी वंदना ) जिनधर्म आराधना चातुर्मास-2026 के अंतर्गत ‘राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी—तत्त्वार्थ सूत्र ग्रन्थराज’ का आयोजन विगत दिवस श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, dreams veeroday , खराड़ी, पुणे में किया गया। यह आयोजन ‘गृद्धपिच्छाचार्य आचार्य श्री उमास्वामी द्विशताब्दी महोत्सव एवं तत्त्वार्थसूत्र वर्ष 2026-27’ के विशेष उपक्रम के रूप में आयोजित हुआ।
तत्त्वार्थसूत्र ग्रंथराज के दर्शन, सिद्धांत और आगमिक दृष्टि को केंद्र में रखकर आयोजित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न स्थानों से आमंत्रित विद्वानों ने अपने शोध पूर्ण विचार प्रस्तुत किए।


परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं परम पूज्य आचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के परम शिष्य प्रशम मूर्ति पूज्य मुनि श्री 108 अजितसागर जी महाराज तथा श्रद्धेय ऐलक श्री 108 विवेकानंदसागर जी महाराज का पावन सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
संगोष्ठी की सबसे विशेष बात यह रही कि यह केवल विद्वानों के व्याख्यानों तक सीमित नहीं रही। प्रत्येक सत्र में विषयों पर सैद्धांतिक खंडन-मंडन, तार्किक विवेचन, प्रश्नोत्तर एवं गहन शास्त्र-चर्चा हुई। सत्र के अंत में पूज्य गुरुदेव ने आगम के प्रमाणों एवं सिद्धांतों के आधार पर प्रस्तुत विचारों का मार्गदर्शन करते हुए सिद्धांतों की पुष्टि की। इस प्रकार विद्वानों का शोध-विमर्श आगम की प्रामाणिकता और साधु-संतों के मार्गदर्शन से जुड़कर और अधिक सार्थक बना।
संगोष्ठी में ब्र.अनिल (इंदौर), ब्र. विनोद जैन (छतरपुर), डॉ. आराधना दीदी (गंज बासौदा), डॉ. अर्चना दीदी (कोटा), ब्र.डा समता जैन (इंदौर) डॉ. फूलचन्द्र जैन प्रेमी (वाराणसी), डॉ. अशोक जैन (वाराणसी), ब्र.डॉ. धर्मेंद्र जैन (जयपुर), डॉ. सुरेंद्र भारती (बुरहानपुर), पंडित विनोद जैन (रजवांस), डॉ. नीलम जैन (पुणे), आचार्य महेंद्र कुमार जैन (मुरैना), डॉ. अनुपम जैन (इंदौर), डॉ. नरेंद्र भारती (सनावद), श्री निर्मल जैन (विदिशा), डॉ. आशीष जैन (शाहगढ़), डॉ. शैलेश जैन (बांसवाड़ा), डॉ. अरिहंत जैन (मुंबई), डॉ. सुमत कुमार जैन (उदयपुर), डॉ. पंकज जैन शास्त्री (इंदौर), श्रीमती नीलम सराफ (ललितपुर), डॉ. लोकेश जैन (बांसवाड़ा), डॉ. कमल कुमार जैन (पुणे), डॉ. ममता जैन (पुणे) एवं पं. अभिषेक जैन (पुणे) ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।
विद्वानों द्वारा भूगोल एवं खगोल, कर्म सिद्धांत एवं पुनर्जन्म, ध्यान, मार्गणा, जीवों के असाधारण भाव, अकाल मरण, तत्त्वार्थसूत्र की ऐतिहासिक परंपरा, गणितीय विवेचन, पंचमों के सैद्धांतिक दृष्टिकोण, चेतना का निर्मलीकरण, पूद्गल द्रव्य, स्त्री-मुक्ति, मोक्ष व मुक्त जीवों का स्वरूप, देव एवं देवगति के जीवों के पारिणामिक भाव, पर्यावरणीय चेतना तथा पाप-पुण्य की मीमांसा जैसे विविध विषयों पर गहन मंथन किया गया।
कार्यक्रम की मुख्य संयोजिका डॉ. नीलम जैन रहीं।
आयोजन जिनधर्म आराधना चातुर्मास कमेटी की ओर से संवेग हरसुले, अभिषेक जैन अरविंद जैन, राजेंद्र जैन, अंशुल जैन ,अर्पित जैन , अमित जैन , अभय जैन, सुमित जैन, वीरेंद्र जैन, शरद बजाज एवं मनीष जैन ने आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
तत्त्वार्थसूत्र के सूत्रों से सिद्धांत तक, सिद्धांत से तर्क-विमर्श तक और तर्क-विमर्श से आत्मचिंतन तक—यह राष्ट्रीय संगोष्ठी शास्त्र को जीवन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रही।
डॉक्टर ममता जैन ✍🏻

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