औद्योगिक राजधानी इंदौर शहर में सादगी पूर्ण बिना कोई बोली,न मंच – माला, न माइक केवल एक कमरे में मुनि श्री 108 सिद्धान्त सागरजी का वर्षायोग मंगल कलश स्थापना हुई
इंदौर ! (देवपुरी वंदना) हमारे आराध्य श्रमण संस्कृति के रक्षार्थ परम पूज्य वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री 108 विमल सागरजी मुनिराज के सुयोग्य शिष्य महान् तपस्वी परम पूज्य मुनि श्री 108 सिद्धांत सागरजी मुनिराज का वर्षायोग 2026 के पावन मंगल कलश स्थापना का आयोजन बहुत सादगी पूर्ण बिना कोई बैनर , पोस्टर, पांडाल बोली, मंच, माला, माइक कुछ नहीं, केवल एक कमरे में कुछ मुनि भक्तों के इंदौर शहर की एयरपोर्ट रोड स्थित गोमटगिरी तीर्थक्षेत्र के सामने चातुर्मास पुण्य स्थल मनोज – सपना मोदी के निज निवास पर 329 आकाश ग्रीन कॉलोनी मे सम्पन्न हुआ।

पंच परमेष्ठी के प्रतीकात्मक केवल पांच मंगल कलशो की स्थापना की हुई!
सम्पूर्ण चातुर्मास में मुनि श्री 108 सिद्धांत सागरजी की आहारचर्या सुबह 10 बजे सम्पन्न होगी। कुछ समय भक्तों को आशीर्वाद एवम् तत्व चर्चा के बाद 22 घंटों के लिये मुनि श्री अपनी साधना, तपस्या में लीन हो जायेंगे एवम् अगले दिन पुनः 10 बजे यहीं क्रम रहेगा।

चातुर्मास (जिसे वर्षा योग भी कहा जाता है) वर्षा ऋतु के चार महीनों (सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) जुलाई ,अगस्त, सितंबर, अक्टूबर ,नवंबर का पवित्र समय है, जिसमें सभी जैन साधु- साध्वियाँ एक ही स्थान पर स्थिर वास करते हैं चातुर्मास से उद्देश्य और महत्व: वर्षा ऋतु में जमीन पर असंख्य सूक्ष्म जीव और छोटे पौधे उत्पन्न हो जाते हैं जीवों की रक्षा (अहिंसा) और अपनी आत्मिक साधना के लिए संत गण विहार (यात्रा) रोककर एक निश्चित स्थान पर रुकते है यह समय तप, त्याग, साधना, आराधना, संयम और स्वाध्याय के लिए उत्तम माना जाता है अवधि: चातुर्मास का आरंभ प्रायः जुलाई – अगस्त में देवशयनी एकादशी या आषाढ़ पूर्णिमा से होता है और यह कार्तिक मास दीपावली तक चलता है श्रावक और श्राविकाओ के लिए: गृहस्थ जीवन वाले जैन अनुयायी इन चार महीनों में विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठान, उपवास, सामायिक और ध्यान करते है !
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