अशोक नगर में षड्यंत्रकारी जैन बंधुओं द्वारा विगत 35 वर्षों से प्रतिष्ठित 105 प्रतिमाजी को बदलने पर अदालत की रोक

अशोक नगर ! (देवपुरी वंदना) नाम पद मंच माला की लालसा मानव मस्तिष्क में जमकर नाचने लगती है फिर चाहे वह दिगंबरत्व की पहचान किसी भी प्रकार से हो जैन समाज में एक और मामला आया है कि मध्य प्रदेश के अशोक नगर में श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विगत 35 वर्षों से प्रतिष्ठित 105 प्रतिमाओं को हटाकर उन्हें संग्रहालय में रखकर उनकी जगह नवीन प्रतिमाओं को विराजमान करने का षड्यंत्र तेजी से गतिमान हो रहा है उसके विरुद्ध समाज की ही श्राविका बहन मोनिका जैन ने कोर्ट में कैस लगाकर स्टे प्राप्त कर लिया है l माननीय न्यायालय अशोकनगर ने जैन मंदिर कमेटी अध्यक्ष आदि सदस्यों को प्रतिमाएं यथावत रखने का आदेश जारी कियाl
न्यायालय ने निम्नलिखित आदेश पारित किया !
प्रकरण का अवलोकन किया गया। प्रकरण के अवलोकन से दर्शित है कि, वादी आवेदक द्वारा हस्तगत वाद निर्देशात्मक स्थाई निषेधाज्ञा हेतु प्रस्तुत किया गया है। प्रकरण के अवलोकन से यह भी दर्शित होता है कि, वादी आवेदक द्वारा प्रस्तुत छायाचित्र में दर्शित है कि, मंदिर प्रांगण में तोड़फोड़ की कार्यवाही की जा रही है एवं प्रतिमा को हटाये जाने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता। यदि अनावेदक / प्रतिवादीगण की उपस्थिति तक उन्हें मूर्ति हटाने की कार्यवाही से नहीं रोका गया तो वादी आवेदक को क्षति होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता एवं वाद लाने का प्रयोजन व्यर्थ हो जायेगा। फलतः प्रकरण में प्रस्तुत शपथ पत्र एवं छायाचित्र के आधार पर वादी/आवेदक द्वारा प्रस्तुत आवेदन अंतर्गत आदेश 39 नियम 03 स्वीकार किया जाता है।
प्रतिवादीगण/अनावेदकगण राकेश कुमार पुत्र स्व. मगनलाल कांसल, धनकुमार पुत्र कबूलचंद जैन, बंटी पुत्र रमेशचन्द्र जैन, श्रेयांस जैन पुत्र प्रकाश जैन एवं आनंद जैन पुत्र हरलाल जैन को निर्देशित किया जाता है कि वह आगामी दिनांक 3 दिसंबर 2025 तक वादग्रस्त मंदिर एवं मूर्तियों के संबंध में यथास्थिति बनाये रखें।

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