असुरक्षित गोमटगिरी की रक्षा के लिए पूरे इंदौर जैन समाज से आव्हान‌ वहीं दूसरी ओर पंचकल्याणक के पात्रों के चयन का आमंत्रण …?

इंदौर! (देवपुरी वंदना) इतिहास में ऐसे हजारों जैन मंदिरों व तीर्थ क्षेत्रों का जिक्र मिलता है । जहां हमारी उदासीनता के चलते अजैन समाज द्वारा कब्जा कर हमारी प्राचीन जैन संस्कृति को खत्म करने का एक चलन सा हो गया है
क्योंकि हमारे जिम्मेदार व्यक्तित्व को धर्म, समाज व संस्कार , संस्कृति से अब कोई लेना – देना नहीं रहा ? चाहे इंदौर शहर में विराजित श्रमण संघीय हो या श्रावक गण सभी को विदित है कि इंदौर दिगंबर जैन समाज की पहचान गोमटगिरी पर गुर्जर समाज द्वारा राजनीतिक संरक्षण व असंवैधानिक गुंडागर्दी कर जबरजस्ती कब्जा किया जा रहा है । जबकि इंदौर जैन समाज को पूर्व प्रशासन द्वारा धार्मिक, सामाजिक भक्ति पूजा भाव के लिए मिली भूमि पर बने जैन तीर्थ क्षेत्र की सुरक्षा की दृष्टि से समाज द्वारा की गई मांग पर वर्तमान शासन – प्रशासन द्वारा तीर्थ क्षेत्र पर परिसीमन (बाउंड्री वॉल ) बनाने में गुर्जर समाज द्वारा जैन समाज को धमकाते हुए व मारपीट कर अपनी मनमर्जी से अपने आने जाने के रास्ते पर आ रही सीमांकन दीवाल को नहीं बनाने दिया जा रहा है वह अपनी सुविधा के अनुसार पहाड़ी को काटकर निर्माण कार्य किया जा रहा है जो कि शासन-प्रशासन की अवहेलना तो कर रहे हैं जिससे जैन समाज में असुरक्षित की भावना आ रही है ।
हमारी उदासीनता हमें अपने तीर्थ क्षेत्र पर अन्य गेर समाज के मंदिर को स्थापित करने में सहायता कर रहा है जिसका असर यह हुआ कि आज वह वहां पर गलत ढंग से जैन समाज को आवंटित भूमि पर कब्जा करते हुए ‌ अपना हक जमा रहे है । फिर भी हमारे इंदौर जैन समाज के कुछ जागरूक श्रावक – श्रेष्ठी जनों द्वारा धर्म के प्रति आस्था ,भक्ति की‌ पताका लेकर समाज व जैन मंदिर परिसर पर आई आपदा का निडर व साहसिक होकर समाज संस्कृति की रक्षा में लगे हैं ।
मगर वहीं दूसरी ओर संतो के सानिध्य में नए मंदिर के निर्माण व पाषाण से परमात्मा बनने की क्रिया पंचकल्याणक महोत्सव के पात्रों का चयन भी उसी समय हो रहे हैं ..? निकटतम प्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र पर आ रही आपदा‌ जिससे हमारी संस्कृति खतरे में है अजैन समाज द्वारा किये जा रहे कब्जे के विरोध में समाज को संगठित कर धर्म, समाज , की पहचान व हमारी आस्था, श्रद्धा, भक्ति को बचाने का सफलतम प्रयास किया जा रहा है। यही हमारी विडंबना है कि इंदौर शहर में विराजित श्रमण संस्कृति अगर जैन तीर्थ क्षैत्र की सुरक्षा का आह्वान करते हुए तीर्थ क्षेत्र पर पहुंचकर समाज पर आई आपदा का निराकरण करने में सहयोग देते । क्योंकि दिगंबर जैन समाज के समकित इंदौर मे श्वेतांबर जैन समाज भी है ।
‌ ‌अब देखना यह है कि जैन समाज की आस्था और भक्ति का केंद्र हमारे जैन तीर्थ क्षेत्र गोमटगिरी पर हो रहे अजैन समाज की असंवैधानिक गतिविधियों की पुनरावृत्ति ना हो ऐसा समाधान निश्चित होना चाहिए ।

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