सिहोनियां जी में 28 सितंबर को वार्षिक मेला जिसमें भगवान शांति नाथ कुंथुनाथ एवं अरहंत नाथ स्वामी की अति प्राचीन प्रतिमाओं का महामस्त का अभिषेक

मुरैना/सिहोनियांजी देवपुरी वंदना (मनोज जैन नायक ✍🏻) जैन धर्मावलंबियों के प्रमुख तीर्थ एवं ऐतिहासिक अतिशय क्षेत्र श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र सिहोनियांजी में क्वार वदी दोज, सोमवार 28 सितंबर को वार्षिक मेला एवं भगवान शांतिनाथ स्वामी सहित मूलनायक भगवान कुंथनाथ एवं अरहनाथ स्वामी का महामस्तकाभिषेक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति एवं हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।


मुरैना जिला मुख्यालय से करीब 33 किलोमीटर दूर स्थित सिहोनियांजी जैन समाज की आस्था का प्रमुख केंद्र होने के साथ-साथ ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण तीर्थ है। यहां भूगर्भ से प्रकट हुईं अतिप्राचीन एवं अतिशयकारी जैन प्रतिमाएं आज भी उसी स्थान पर विराजमान हैं, जहां से वे प्राप्त हुई थीं। प्राप्त शिलालेखों, साहित्यिक प्रमाणों एवं पुरातत्वविदों के अनुसार इन प्रतिमाओं का इतिहास ग्यारहवीं शताब्दी से जुड़ा हुआ माना जाता है।
16 फुट ऊंची भगवान शांतिनाथ की भव्य प्रतिमा
मुख्य मंदिर के विशाल एवं भव्य हॉल में 16 फुट उत्तुंग तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ स्वामी की मनोहारी प्रतिमा विराजमान है। उनके दोनों ओर 11-11 फुट ऊंची भगवान कुंथनाथ स्वामी एवं भगवान अरहनाथ स्वामी की विशाल पाषाण प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं। सिहोनियांजी की विशेषता यह है कि यहां भूगर्भ से प्राप्त प्रतिमाओं को उनके प्राकट्य स्थल पर ही प्रतिष्ठित कर विराजमान किया गया है।
मुख्य मंदिर के परकोटे में श्री समोशरण जिनालय, श्री पार्श्वनाथ जिनालय, श्री पद्मप्रभु जिनालय एवं श्री नेमीनाथ जिनालय स्थित हैं, जिनमें अनेक प्राचीन जैन प्रतिमाएं विराजमान हैं। मुख्य मंदिर परिसर के बाहर हाल ही में विशाल एवं भव्य श्री कमल मंदिर, श्री नेमीनाथ जिनालय तथा भगवान शांतिनाथ स्वामी की 31 फुट उत्तुंग मनोहारी प्रतिमा भी स्थापित की गई है। श्री समोशरण जिनालय एवं कमल मंदिर में श्री चौबीसी का निर्माण कराया गया है। वहीं विशाल परकोटे में स्थापित पांच भव्य मानस्तंभों का समूह भी तीर्थ की शोभा में चार चांद लगाता है।
प्रातः अभिषेक-शांतिधारा, दोपहर में महामस्तकाभिषेक
वार्षिक मेले के अवसर पर परम पूज्य आर्यिका संगममति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में  प्रातःकाल अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्यमह पूजन के बाद श्री शांतिनाथ महामंडल विधान का भव्य आयोजन होगा। दोपहर 2 बजे से मूलनायक भगवान शांतिनाथ, कुंथनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की प्रतिमाओं का महामस्तकाभिषेक श्रद्धापूर्वक किया जाएगा।विधान एवं महामस्तकाभिषेक सहित समस्त धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य पं. राजेन्द्र जैन शास्त्री मगरौनी एवं संजय शास्त्री सिहोनियां के मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ संपन्न कराएंगे। कार्यक्रम के समापन के पश्चात आगंतुक साधर्मी बंधुओं के लिए आयोजकों की ओर से वात्सल्य भोज की व्यवस्था भी की गई है।
स्वप्न के आधार पर हुई थी प्रतिमाओं की खोज
सिहोनियांजी अतिशय क्षेत्र की प्रतिमाओं के प्राकट्य से जुड़ा इतिहास भी अत्यंत रोचक है। स्थानीय ब्रह्मचारी श्री गुमानी लाल जी जैन भैयाजी को वर्ष 1937 में स्वप्न आने के बाद अम्बाह, मुरैना एवं आसपास के समाजजनों द्वारा संबंधित टीले की खुदाई कराई गई। खुदाई के दौरान भूगर्भ से ग्यारहवीं शताब्दी की भगवान शांतिनाथ स्वामी की 16 फुट तथा भगवान कुंथनाथ एवं अरहनाथ स्वामी की 11-11 फुट ऊंची अत्यंत मनोहारी पाषाण प्रतिमाएं प्राप्त हुईं। आज भी ये प्रतिमाएं उसी स्थान पर विराजमान हैं। खुदाई में अनेक खंडित प्रतिमाएं भी प्राप्त हुई थीं, जिन्हें संग्रहालय बनाकर सुरक्षित रखा गया है।
श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध हैं सुविधाएं
तीर्थ क्षेत्र में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवास एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां एसी एवं डीलक्स कमरे, विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के लिए हॉल, भोजनालय तथा कैंटीन आदि की व्यवस्था है। सिहोनियांजी ग्वालियर-भिंड राजमार्ग पर मालनपुर एवं वाराहेट मार्ग से ग्वालियर से करीब 55 किलोमीटर तथा मुरैना से लगभग 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मुरैना रेलवे स्टेशन के समीप से सिहोनियांजी के लिए बस एवं टैक्सी आदि साधन भी उपलब्ध रहते हैं।
श्री 1008 शांतिनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र कमेटी ने समस्त साधर्मी बंधुओं से वार्षिक मेले एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव में अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर धर्मलाभ लेने का
आह्वान किया है !

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.