पट्टाचार्य श्री 108 सुनील सागर जी गुरुदेव के मंगल चरणों से पावन हुई नरसिंह वाटिका, श्वेतांबर साध्वी डॉ. कुमुदलता जी ने की मंगल अगवानी

इंदौर। (देवपुरी वंदना) औद्योगिक राजधानी लघु मुंबई और मेट्रो सिटी के नाम से पहचाने जाने वाली इंदौर नगर की एयरपोर्ट रोड स्थित नरसिंह वाटिका में दिगम्बर जैन आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी गुरुदेव ससंघ का श्वेताम्बर साध्वी डॉ. कुमुदलता जी महाराज साहब ससंघ के साथ मंगल मिलन हुआ। इस अवसर पर साध्वी जी ने आचार्य श्री ससंघ की मंगल अगवानी करते हुए उनका आत्मीय स्वागत किया।


मंगल मिलन के अवसर पर आचार्य श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव ने अपने उद्बोधन में जैन समाज की एकता पर बल देते हुए कहा कि संसार में हजारों-लाखों ऐसे लोग हैं, जिनका कोई अता-पता नहीं है। ऐसे में हम सभी को मिल-जुलकर जैन धर्म के पताका को आकाश की ऊंचाइयों तक लहराने का प्रयास करना चाहिए।
श्वेताम्बर साध्वी डॉ. कुमुदलता जी महाराज साहब ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आज अत्यंत हर्ष का विषय है कि आचार्य प्रवर श्री सुनीलसागर जी गुरुदेव के मंगल चरण नरसिंह वाटिका में पड़े और हमारी यह झोपड़ी पवित्र हो गई। उन्होंने कहा कि संतों का मिलन अत्यंत दुर्लभ होता है, जबकि श्रावक-श्राविकाएं तो अपने गुरु भगवंतों के दर्शन के लिए कभी भी आ-जा सकते हैं। आज इस चतुर्विध संघ के आगमन पर मैं हृदय से अभिनंदन करती हूं।


उन्होंने कहा कि इस वर्ष इंदौर नगरी में लगभग सवा सौ गुरु भगवंत विभिन्न क्षेत्रों में वर्षायोग कर मां अहिल्या की पावन धरा को पवित्र बना रहे हैं। साध्वी जी ने भावना व्यक्त की कि आगामी 27 तारीख को सभी सम्प्रदायों के गुरु भगवंत एक मंच पर एकत्रित होकर सामूहिक क्षमावाणी करें और भगवान महावीर के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाएं।
इस अवसर पर साध्वी जी ने आचार्य श्री के मंगलमय जीवन की कामना करते हुए कहा—
“आचार्य भगवान, आपके जीवन में छाई रहें बहारें,
बगिया फूलों-सी खिलती रहे,
आपके जीवन में सफलता
आपको हर वक्त मिलती रहे।”


दिगम्बर एवं श्वेताम्बर संतों का यह मंगल मिलन जैन समाज की एकता, सद्भाव और भगवान महावीर के संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने की प्रेरणा देने वाला बना।

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