कृषि प्रधान भारत देश का व्यवसायिक स्वरुप मांसाहार का बढ़ता साम्राज्य !!

इंदौर ! ( देवपुरी वंदना ) पूरा विश्व जानता है कि तेजी से बढी अदृश्य कोरोना महामारी एक वायरस के कारण फैला जिसने सभी को अपने ही घर पर नजर बंद कर दिया था । इस महामारी की बारे में बच्चों से भी पूछा जाए तो वह यही बताएंगा कि किसी पशु या जानवर को मारने से यह महामारी सभी को बर्बाद कर गई । फिर भी भारत देश अपने व्यापारिक लाभ के चलते पशु पक्षियों को मारकर धन कमाना चाहते हैं। इसमें शासन – प्रशासन मूक दर्शक बनकर धन लाभ ले रही है
हम कैसे किसी निर्दोष जीव की हत्या कर सकते हैं ? किसने दिया हमे ये अधिकार? क्या कसूर है उनका ? ये की वो बेजुबान पशु -पक्षी है, वो प्रतिकार नहीं कर सकते? उनके लिए कोई कानून नहीं है?


हम मानव हैं , भगवान ने हमे मानव बनाया है, तो हम में मानवता होनी भी तो चाहिए ,यह कैसी मानवता है की अपने स्वाद के लिए हम उनकी हत्या करे , सिर्फ एक समय के भोजन के लिए उनकी हत्या कर दी जाये ,हम प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे हैं , मनुष्य को भगवान ने मांसहारी नहीं बनाया है , मांसहारी जीवो के कुछ पहचान होते हैं जैसे – उनके आँख रात को चमकते है, उनके नाख़ून नुकीले और बड़े-बड़े होते हैं, उनके दांत बड़े-बड़े होते हैं . सबसे महत्वपूर्ण पहचान यह है की वो पानी चाट कर पीते हैं अब आप लोंगो से सवाल है की क्या , इनमे से एक पहचान भी हम इंसानों से मिलती है ? क्या हम इन्सान चाट कर जीभ से पानी पीते हैं ? क्या हमारे आँख रात के अँधेरे में चमकते हैं ? नहीं ना, तो फिर हम मांस भक्षण कैसे कर सकते हैं ? ईश्वर ने हमे मानव तन इसलिए नहीं दिया की हम निर्दोष जीवों को अपने स्वार्थ के लिए मार दें , बहुत से लोगो का तर्क होता है की मांस भक्षण से ताकत आती है, तो हाथी को देखिये हाथी शुद्ध शाकाहारी होता है क्या वो ताकतवर नहीं होता , भैसा, घोडा, सांड शुद्ध शाकाहारी होते है, उनको देखिये क्या वो ताकतवर नहीं हैं , कुछ लोग कहते हैं की मांस व्यापार से कई परिवारों का भरण-पोषण होता है , तो चोर, डकैत ये भी तो हमे लुटते है इसीलिए की वो अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके तो, उनको तो हम सब दोषी मानते हैं अगर अपने स्वार्थ के लिए किसी का अहित करना हम ठीक मानते हैं तो जो भी अपने स्वार्थ के लिए किसी का भी अहित करता है, वो भी ठीक है, कैसी कुंठित सोच हो गई है हमारी, आप उन पशु-पक्षियों को को देखिये जब उनको काटने के लिए लाया जाता है तो उनके आँखों में कितना डर और दर्द होता है, हमे क्या हो गया है, कैसी दैत्यों वाली प्रवृति होती जा रही है हमारी, अगर कोई इन्सान कहता है की उसे मांस अच्छा लगता है तो भाई मेरे अच्छा मांस नहीं लगता उसमे जो मिर्च तेल मसाला होता है अच्छा वह लगता है, जो की शाकाहार है. मांसाहार में कोई स्वाद नहीं है वो तो लाश है लाश एक मृत जीव का मृत शरीर शाकाहार के साथ सारा जीवन बिताया जा सकता है पर मांसाहार पे नहीं, चलो आपसे मैं कहता हूँ एक हफ्ता सिर्फ मांस खाओ पानी भी नहीं पीना है क्यों की पानी भी शाकाहार हीं है पीना है तो खून पीना और तब जिंदगी जी कर दिखाओ, दुनियां के सभी मांसाहारी सिर्फ मांस पर रह कर दिखाओ एक हफ्ता लगातार खा के दिखाओ और तब कहना अच्छा लगता है और उससे बल मिलता है.
हमे कुदरत ने मांसहारी नहीं बनाया है. हम जब किसी को जीवन दे नहीं सकते तो हमें उनका जीवन छिनने का भी कोई अधिकार नहीं है.
इसलिए कृपया मांसाहार बंद करे, और खुद भी जीये और उन्हें भी जीने दे सभी जीव-जंतुओं को काटने-मारने पे हमारे तरह हीं उनको भी पीड़ा होती है, ईश्वर ने हमे इन्सान बनाया इस बात का हमे ईश्वर को धन्यवाद देना चाहिए, और अपनी उर्जा का सदुपयोग करना चाहिए. कमजोर पे ताकत दिखाना कायरता है बहादुरी नहीं अपनी शक्ति को सही जगह इस्तेमाल करें और पशु-पक्षियों से प्यार करे उन्हें मारे नहीं.धन तो किसी और व्यापार से भी कमाया जा सकता है ।

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