दिगम्बर-श्वेताम्बर समाज ही नहीं, पूरा राणापुर उतरा गुरुवर की अगवानी में आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज सस॑घ के ऐतिहासिक मंगल प्रवेश से धर्ममय हुआ नगर

राणापुर। (देवपुरी वंदना) मध्यप्रदेश की सीमा में प्रवेश के पश्चात परम पूज्य मुनिकुंजर ज्येष्ठाचार्य श्री 108 आदिसागर जी महाराज (अंकलीकर) परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश, प्राकृताचार्य एवं राष्ट्र गौरव आचार्य भगवंत 108 श्री सुनीलसागर जी महाराज ससंघ का प्रथम मंगल प्रवेश राणापुर नगर में अत्यंत भव्य, श्रद्धामय एवं ऐतिहासिक वातावरण में सम्पन्न हुआ।
बैंड-बाजों, मंगल गीतों, जयघोषों और धर्मध्वजाओं के साथ नगरवासियों ने गुरुवर की अगवानी की। श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत इस अवसर पर केवल दिगम्बर एवं श्वेताम्बर जैन समाज ही नहीं, बल्कि संपूर्ण राणापुर नगर एकजुट होकर स्वागत के लिए उमड़ पड़ा। नगर का वातावरण धर्ममय और उत्सवमय बन गया।
अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री ने राणापुर की धर्मनिष्ठ जनता की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा, “मैं अनेक गांवों में गया हूं, किन्तु यह पहला ऐसा गांव है जहां केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि पूरा राणापुर नगर मुनिराजों की अगवानी के लिए उमड़ पड़ा है।”
गुरुदेव ने कहा कि “राणापुर की धरती धन्य है, जहां श्रद्धा के दीप जलते हैं और संस्कारों के बीज पलते हैं। गांव तब महान नहीं होता जब उसके भवन बड़े हो जाते हैं, बल्कि तब महान बनता है जब वहां रहने वाले लोगों के मन बड़े हो जाते हैं।”
आचार्य श्री ने श्रद्धा, भक्ति और प्रेम को जीवन का वास्तविक सुख बताते हुए कहा कि मिल-जुलकर रहने में जो आनंद है, वह विरोध और तकरार में कभी प्राप्त नहीं हो सकता। उन्होंने सकारात्मक सोच, सामाजिक समरसता और सद्भावपूर्ण जीवन का संदेश देते हुए कहा कि सकारात्मक कार्यों में कम ऊर्जा लगती है, जबकि नकारात्मकता मनुष्य की शक्ति और समय दोनों को नष्ट कर देती है।
उन्होंने कहा कि संस्कारित परिवार, उत्तम समाज, सुंदर नगर और महान राष्ट्र की प्राप्ति बड़े पुण्यों का परिणाम है। भारत की संस्कृति अहिंसा, सदाचार और शाकाहार पर आधारित है, जहां चींटी से लेकर पशु-पक्षियों तक को कष्ट पहुंचाना भी पाप माना गया है। गुरुदेव ने सभी को करुणा, सह-अस्तित्व और सद्भावपूर्ण जीवन अपनाने की प्रेरणा दी।
प्रवचन के समापन पर आचार्य श्री ने कहा, “आपका व्यवहार ही आपकी वास्तविक पहचान है, अन्यथा आपके नाम के हजारों लोग संसार में मिल जाएंगे।” उनके प्रेरणादायी वचनों ने उपस्थित जनसमुदाय को आत्मचिंतन, संस्कार और सदाचारपूर्ण जीवन की दिशा में प्रेरित किया।
राणापुर का यह ऐतिहासिक मंगल प्रवेश धार्मिक एकता, सामाजिक समरसता, गुरुभक्ति और भारतीय संस्कृति के जीवन मूल्यों का अनुपम उदाहरण बन गया। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय, प्रेरणादायी एवं पुण्यदायी अवसर बताया।

