जतारा में 8 वर्ष से ऊपर बालक – बालिकाओं का उपनयन संस्कार हुआ

जतारा !(देवपुरी वंदना ) श्री 1008 दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र आदिश्वर धाम जतारा में परम पूज्य चर्या शिरोमणि पट्टाचार्य 108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के “गूगल बाबा” के नाम से प्रसिद्ध सुयोग्य शिष्य परम पज्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ससंघ के मंगल सानिध्य में नगर के समस्त 8 वर्ष से ऊपर के जैन बालक बालिकाओं का उपनयन संस्कार संपन्न किया गया ।
भारतीय जैन संगठन तहसील जतारा अध्यक्ष एवं जैन समाज उपाध्यक्ष अशोक कुमार जैन ने बताया कि प्रातः काल 6:00 बजे से श्री मंदिर की में अभिषेक, शांति धारा, पूजन की क्रियाएं संपन्न हुई तत्पश्चात शुरू हुआ “उपनयन संस्कार” ।
सलेहा से एवं टीकमगढ़ से पधारे विकर्ष शास्त्री एवं सुनील शास्त्री के कुशल निर्देशन में उपनयन की समस्त क्रियाएं संपन्न की गई।
परम पूज्य मुनि श्री के समक्ष समस्त उपनयन संस्कार बाले श्रावक श्राविकाओं ने मद्य, मांस, मधु एवं सप्त व्यसनों का त्याग किया ।
परम पूज्य मुनि समत्व सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन के माध्यम से समस्त श्रावक श्राविकाओं को बताया कि ‘सप्त व्यसन’ (सात बुरी आदतें या लतें) जीवन को बर्बाद करने वाली होती है, जिनका त्याग करने से हमें अपने जीवन में कभी भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा और हमारी आत्मा का कल्याण होगा । पूज्य मुनि श्री ने कहा किइन लतों से व्यक्ति की बुद्धि और विवेक नष्ट हो जाता है, और व्यक्ति का पतन होने लगता है।

पूज्य मुनि श्री ने बताया कि वह सप्त व्यसन कौन-कौन से हैं
1-जुआ खेलना: धन कमाने के लालच में सट्टा, जुआ या लॉटरी जैसी गतिविधियों में पड़ना।2- मांस भक्षण: स्वाद या आदत के लिए जीवों को मारकर उनका मांस खाना। 3-मदिरापान (शराब पीना): शराब, भांग, अफीम या किसी भी प्रकार के नशे का सेवन करना।4- वेश्यागमन: अनैतिक यौन संबंधों में लिप्त होना या वेश्यावृत्ति को बढ़ावा देना।5- शिकार करना: मनोरंजन या शौक के लिए बेजुबान जानवरों का शिकार करना। 6-चोरी करना: दूसरों का धन, संपत्ति या अधिकार अनुचित तरीके से छीनना या चुरान और 7- पर-स्त्री सेवन: अपनी पत्नी के अलावा अन्य स्त्रियों के साथ अवैध शारीरिक या अनैतिक संबंध बनाना। इन व्यसनों के अलावा, आधुनिक समय में नशे (तंबाकू, सिगरेट, ड्रग्स), अश्लील सामग्री और अत्यधिक डिजिटल लत को भी प्रमुख व्यसनों के रूप में देखा जाता है।
पूज्य मुनि श्री ने समस्त उपनयन संस्कार वालों को इन सप्त व्यसन का त्याग करवाया ।

पूज्य मुनि श्री ने उदाहरण के माध्यम से बताया कि यदि कोई कहता है कि जीवन में हर काम एक बार करना चाहिए, तो मुनि श्री ने कहा यदि कोई ऐसा कहता है तो उससे जाकर बोलो कि ठीक है चलो तुम एक बार जहर खाकर उसका टेस्ट बताओ कैसा होता है ।
जैन समाज प्रवक्ता अशोक कुमार जैन ने बताया कि परम पूज्य मुनि समत्व सागर जी महाराज वर्तमान में युवाओं में सबसे ज्यादा लोकप्रिय साधु है । परम पूज्य मुनि श्री हमेशा “वंडरफुल जैनिज्म” की बात करते हैं, जिससे समस्त युवा वर्ग पूज्य मुनि श्री से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाता ।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से महेंद्र टानगा, इं. संतोष मोदी, इं. पवन मोदी, राजेश माते, स्वप्निल सिंघई, मुकेश जैन, राजू सिंघई, टन्नु चौधरी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे ।
