कामां की धरा भक्ति भाव से भरी हुई है – आचार्य श्री सुनील सागरजी
कामां ! (राज.) व्यापारी अपने प्रतिष्ठान पर लाभ के साथ शुभ लिखते हैं और यदि वही लाभ शुभ कार्यों में खर्च किया जाएं तो वह शुभ पुण्य में परिवर्तित हो जाता है। कामां की धरा पर बड़ी ही भक्ति भाव से भरे लोग है आज सर्व समाज ने जो आगवानी की है…
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