देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर एवं कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ के मध्य MOU सम्पन्न जैन दर्शन, प्राकृत भाषा, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं पाण्डुलिपि संरक्षण के क्षेत्र में होगा व्यापक पारस्परिक सहयोग
इन्दौर। (देवपुरी वंदना) जैन दर्शन, प्राकृत भाषा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा को उच्च शिक्षा और आधुनिक अनुसंधान से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इन्दौर एवं कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इन्दौर के मध्य समझौता ज्ञापन (MOU) सम्पन्न हुआ।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों संस्थाओं के बीच शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, प्रकाशन तथा समाज उपयोगी एवं विस्तार गतिविधियों में पारस्परिक सहयोग को मजबूत करना है।
जैन दर्शन एवं प्राकृत भाषा को मिलेगा नया अकादमिक मंच
MOU के अंतर्गत जैन दर्शन, जैन विद्या, प्राकृत भाषा एवं साहित्य तथा भारतीय ज्ञान परम्परा से जुड़े शिक्षण, शोध एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रमाणपत्र, डिप्लोमा, डिग्री, अल्पकालीन, कौशल विकास एवं मूल्यवर्धित पाठ्यक्रमों के संचालन में भी दोनों संस्थाएँ सहयोग करेंगी।
दोनों संस्थाएँ संयुक्त शोध परियोजनाओं, नवाचार, प्रकाशन एवं ज्ञान-सृजन को प्रोत्साहित करने के साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यानमाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगी।
पाण्डुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण पर विशेष
इस समझौते की एक महत्वपूर्ण विशेषता जैन साहित्य एवं प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं प्रसार को लेकर किया गया सहयोग है। दोनों संस्थाओं के पुस्तकालय, पाण्डुलिपि संग्रह, अभिलेखागार, संग्रहालय एवं डिजिटल संसाधनों का शैक्षणिक एवं शोध कार्यों के लिए पारस्परिक उपयोग किया जा सकेगा।
विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों के आदान-प्रदान, इंटर्नशिप एवं अध्ययन भ्रमण को भी बढ़ावा मिलेगा।
संयुक्त शोध एवं प्रकाशन को मिलेगी गति
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, उद्योगों, CSR एवं शासकीय एजेंसियों के सहयोग से विभिन्न शोध एवं विकास परियोजनाएँ संचालित करने का भी प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही संयुक्त रूप से पुस्तकों की सामग्री, शोध प्रकाशन एवं अन्य ज्ञानवर्धक सामग्री के विकास में सहयोग किया जाएगा।
गणमान्यजनों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई, कुलसचिव प्रो. प्रज्ज्वल खरे, जैन स्टडीज सेंटर के निदेशक प्रो. रजनीश जैन एवं सह-निदेशक प्रो. राहुल सिंघई तथा कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ के अध्यक्ष इंजी. अमित कासलीवाल, ट्रस्टी आदित्य कासलीवाल, सचिव डॉ. अरविन्द कुमार जैन एवं ‘सिरि भूवलय’ शोध परियोजना के निदेशक इंजी. अनिल कुमार जैन सहित संबंधित पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
जैन ज्ञान परम्परा के लिए महत्वपूर्ण कदम
यह MOU जैन दर्शन, प्राकृत भाषा, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण को आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के लिए अध्ययन और शोध के नए अवसर खुलेंगे तथा जैन ज्ञान परम्परा के संरक्षण, संवर्धन एवं वैश्विक प्रसार को नई गति मिलने की उम्मीद है।


