लोनारा खरगोन का धर्म प्रभावना संघ का 108 यात्रियों का दल 15 अगस्त को सम्मेद शिखर जी के लिए प्रस्थान करेगा पंचम वर्ष में आयोजित हो रही यात्रा, जैनेतर 16 श्रद्धालु भी होंगे शामिल_
सनावद/लोनारा। जैन धर्म के सबसे बड़े तीर्थ एवं 20 तीर्थंकरों की निर्वाण भूमि सम्मेद शिखर जी की यात्रा का शास्त्रों में अत्यंत महत्व बताया गया है। सन्मति काका ने बताया कि मोक्ष कल्याणक भूमि के दर्शन मात्र से आत्मा को शांति एवं पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी भावना से धर्म प्रभावना तीर्थ यात्रा संघ खरगोन एवं लोनारा द्वारा प्रति वर्ष इस पवित्र यात्रा का आयोजन किया जाता है। संघ के संयोजक आशीष जैन, अंतिम जैन एवं हिमांशु कासलीवाल ने बताया कि संघ द्वारा पार्श्वनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक महापर्व पर सम्मेद शिखर जी की यात्रा आयोजित की जाती है। यह यात्रा पिछले 4 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही है। इस वर्ष यात्रा का पंचम वर्ष है।
108 यात्रियों का दल 15 अगस्त को प्रस्थान
संयोजकों ने बताया कि 15 अगस्त, शनिवार को इंदौर से रात्रि में क्षिप्रा एक्सप्रेस से 108 यात्रियों का दल पारसनाथ के लिए प्रस्थान करेगा।
मीडिया प्रभारी नेहा अरिहंत जैन एवं रिवेश जैन ने बताया कि यह सात दिवसीय यात्रा है। यात्रा के पूर्व इंदौर में विराजित आचार्य सुनील सागर जी, आचार्य सिद्धांत सागर जी, मुनि पुंगव सुधा सागर जी, मुनि श्री साध्य सागर जी आदि ससंघ का मंगल आशीर्वाद यात्रियों को प्राप्त होगा।
विशेषता :
इस यात्रा की विशेषता यह है कि लोनारा ग्राम के 16 जैनेतर यात्री जो जन्म से जैन नहीं हैं, लेकिन जैन धर्म का पालन करते हैं, वे भी प्रतिवर्ष अनुसार इस यात्रा में शामिल हो रहे हैं।
अविनाश जैन एवं अरिहंत बिछौना ने बताया कि सम्मेद शिखर जी में सामूहिक यात्रा के साथ ही सामूहिक संगीतमय विधान का भी आयोजन किया जाएगा।
संयोजक सौरभ जैन एवं यश जैन ने बताया कि दल में लगभग 30 यात्री शाश्वत जन्मभूमि अयोध्या एवं बनारस की यात्रा करते हुए शिखर जी पहुंचेंगे।
समाजसेवी सन्मति जैन काका ने बताया कि सम्मेद शिखर जी की यात्रा जीवन में एक बार अवश्य करनी चाहिए। उन्होंने अधिक से अधिक धर्मप्रेमियों से इस पुण्य यात्रा में सहभागी बनने की अपील की है।

