अंकलीकर परंपरा के चतुर्थ पट्टाचार्य के सुयोग्य शिष्य इंदौर गौरव मुनि श्री 108 सविज्ञ सागर जी के तप, साधना – आराधना के 186 दिवसीय सिंह निष्क्रिडित महाव्रत के चलते 153 उपवास और 33 पारणा महोत्सव के साक्षी बने
इंदौर | ( देवपुरी वंदना ) तप, साधना – आराधना का आध्यात्मिक महापर्व वर्षायोग के पावन अवसर पर
सिंह निष्क्रीडित व्रत जैन धर्म का एक अत्यंत कठिन, विशिष्ट और महान तपस्या व्रत है। यह व्रत जघन्य, मध्यम और उत्कृष्ट के भेद से तीन प्रकार का होता है, जिसमें क्रमिक रूप से उपवास और पारणा की संख्या बढ़ती और घटती है। इस कठोर साधना से आत्मा की शुद्धि होती है।
आचार्य श्री 108 आदिसागर अंकलीकार परंपरा के चतुर्थ पट्टाचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महा मुनिराज के कर कमलों से दीक्षित परम् प्रभावक तपस्वी इंद्रपुरी इंदौर नगर गौरव मुनि 108 श्री संविज्ञ सागर जी महा मुनिराज आचार्य श्री के पावन सानिध्य में इस वर्ष – 2026 का तप, साधना – आराधना का आध्यात्मिक वर्षायोग इंद्रपुरी (इंदौर) में चल रहा है जिसमें मुनि श्री विगत 28 जुलाई 2026 से मध्यम सिंह निष्क्रडित व्रत की महासाधना कर रहे हैं जिसमें मुनिराज के कुल 186 दिवस में से 153 निर्जल उपवास एवं 33 पारणा होंगे। मुनि श्री108 संविज्ञ सागर जी महाराज दीक्षा से ही नियमित रूप से तप साधना चल रही है। विगत वर्ष – 2022 के अजमेर के वर्षायोग में मुनि श्री द्वारा एकांतर की साधना की गई(जिसमें 1आहार एवं 1उपवास) की साधना के साथ दश लक्षण के 10 निर्जल उपवास किए
वर्ष – 2023 के भोपाल वर्षायोग में मुनि श्री द्वारा 32 निर्जल उपवास किए।
वर्ष 2024 नैनवा जिला बूंदी राजस्थान के वर्षायोग में मुनि श्री द्वारा चातुर्मास कलश स्थापना से 2 उपवास 1 आहार, 3 उपवास 01 आहार के बाद दिनांक 19 अगस्त 2024 से 06 अक्टूबर 2024 तक कुल 48 निर्जल उपवास (33 वे उपवास पर मुनि श्री द्वारा गुरु आज्ञा से जलाहार ग्रहण किया) किए।
इसलिए विशेष यह रहा कि 33 वे उपवास के दिन मुनि श्री जब जला हार के लिए आकड़ी लेकर निकले तब सम्पूर्ण नगर में मुनि श्री द्वारा घर घर लगे चौंके में भ्रमण किया मुनि श्री द्वारा 33 वे उपवास के लगभग 3 से 4 किलोमीटर नगर भ्रमण किया उसके बाद विधि मिली
वर्ष – 2025 के अहमदाबाद वर्षायोग में मुनि श्री द्वारा लघु सिंह निष्क्रडित व्रत की महा साधना की गई थी जिसमें मुनिराज ने कुल 80 दिवस में से 60 निर्जल उपवास एवं 20 पारणा किए।
मुनि श्री 108 संविज्ञ सागर जी महाराज जी का परिचय
पूर्व नाम:-मनीष जैन
पिता : श्री रवि किरण जी शहा
माता: श्रीमती रानी शहा
जातिः जैन (दशा हुमड)
जन्म स्थान : इन्दौर
तहसील : – जिला: इन्दौर प्रांतः मध्यप्रदेश
जन्म तिथि : 07 मार्च 1985
शिक्षाः आठवीं , आध्यात्मिक शिक्षा का गहन चिंतन मनन
ब्रह्मचर्यः 2 साल
श्री सुनील सागर जी द्वारा
प्रतिमा रुप व्रत : 2020
प्रतापगढ़ (शांतिनाथ)
कितनी : 2 प्रतिमा
क्षुल्लक दीक्षाः
26 जुलाई 2020
मुनि दीक्षा दीक्षा :
15 अक्टूबर 2021
श्री अंदेश्वर पार्श्वनाथ बांसवाड़ा राजस्थान मै हुई !
आओ हम सब मिलकर गुरुवर मुनि श्री के भक्ति भाव तप, साधना – आराधना व श्रद्धा के इस मार्ग पर कुछ साहसिक नव चेतना के साथ अनुमौदना के कुछ पल साथ बिताए !
व आने वाले नए वर्ष की 29 जनवरी 2027 को महोत्सव में
अपनी सहभागिता दर्ज कराते हुए इंदौर गौरव मुनि श्री की तप तपस्या साधना का भावपूर्वक अनुसरण करें !


