भारत- नेपाल संबंधों में मीडिया की सकारात्मक भूमिका –“महाराष्ट्र गौरव” डॉ.अल्पना जैन राष्ट्रीय सांस्कृतिक मंत्री – अथाई मीडिया इंटरनेशनल मालेगांव, नासिक (महाराष्ट्र)✍🏽

मालेगांव । (देवपुरी वंदना) भारत और नेपाल के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और भौगोलिक निकटता पर आधारित हैं। दोनों देशों के बीच खुली सीमा, सांझा परंपराएँ, और गहरी जन-से-जन संपर्क की भावना इन रिश्तों को विशेष बनाती है। ऐसे में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वही जनमत को आकार देता है और दोनों देशों के बीच समझ तथा सहयोग को मजबूत करता है।


मीडिया की सकारात्मक भूमिका का सबसे प्रमुख पहलू है—विश्वसनीय और संतुलित जानकारी का प्रसार। जब मीडिया निष्पक्ष होकर समाचार प्रस्तुत करता है, तो वह अफवाहों और गलतफहमियों को कम करता है। भारत और नेपाल के बीच कई बार राजनीतिक या कूटनीतिक मुद्दों पर मतभेद उभरते हैं, लेकिन जिम्मेदार मीडिया इन मतभेदों को बढ़ाने के बजाय संवाद और समाधान पर जोर देता है।
दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना। भारत और नेपाल की संस्कृति में गहरी समानता है—जैसे भाषा, धर्म, त्योहार और रीति-रिवाज। मीडिया इन साझा मूल्यों को उजागर करके दोनों देशों के लोगों के बीच आत्मीयता और भाईचारे की भावना को मजबूत करता है। टीवी कार्यक्रम, फिल्में, समाचार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस दिशा में सेतु का कार्य करते हैं।
तीसरा, मीडिया आर्थिक और पर्यटन संबंधों को भी प्रोत्साहित करता है। जब मीडिया नेपाल के प्राकृतिक सौंदर्य या भारत के सांस्कृतिक स्थलों को सकारात्मक रूप से प्रस्तुत करता है, तो पर्यटन बढ़ता है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है। साथ ही, व्यापार और निवेश के अवसरों की जानकारी भी मीडिया के माध्यम से फैलती है।
इसके अतिरिक्त, संकट के समय मीडिया सहयोग और मानवीय संवेदनाओं को भी सामने लाता है। जैसे प्राकृतिक आपदाओं या महामारी के दौरान मीडिया दोनों देशों के सहयोग और सहायता प्रयासों को उजागर करता है, जिससे आपसी विश्वास और एकजुटता मजबूत होती है।
हालांकि, यह भी आवश्यक है कि मीडिया सनसनीखेजता से बचे और जिम्मेदारी के साथ कार्य करे। नकारात्मक या भ्रामक खबरें दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा कर सकती हैं। इसलिए मीडिया को तथ्यों की जांच, संतुलन और संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए।
“रोटी-बेटी” और “आस-भात” जैसे लोकप्रचलित भाव केवल शब्द नहीं, बल्कि भारत – नेपाल गहरे सम्बन्धों तथा सामाजिक-सांस्कृतिक रिश्तों के प्रतीक हैं। “रोटी-बेटी” का अर्थ है—आपसी वैवाहिक संबंध और पारिवारिक जुड़ाव, जबकि “आस-भात” साझा जीवन, भोजन और आत्मीयता की भावना को दर्शाता है। इन मूल भावनाओं को मजबूत बनाने में मीडिया की सकारात्मक भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
मीडिया जब इन पारंपरिक रिश्तों को प्रमुखता से प्रस्तुत करता है, तो वह लोगों को उनकी साझा विरासत की याद दिलाता है। भारत और नेपाल के बीच हजारों वर्षों से वैवाहिक संबंध स्थापित होते आए हैं, विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्रों में।
मीडिया इन कहानियों, परंपराओं और लोक-जीवन को उजागर करके यह संदेश देता है कि दोनों देशों के रिश्ते केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि दिलों से जुड़े हुए हैं।
इसी प्रकार “आस-भात” की भावना—यानी एक-दूसरे के साथ बैठकर जीवन साझा करना—भी मीडिया के माध्यम से सशक्त बनती है। जब समाचार, वृत्तचित्र या कार्यक्रम दोनों देशों के लोगों के दैनिक जीवन, त्योहारों और परंपराओं को दिखाते हैं, तो वह आत्मीयता और अपनत्व को बढ़ाते हैं। इससे आम नागरिकों के बीच दूरी कम होती है और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ता है।
मीडिया का एक और महत्वपूर्ण कार्य है—इन रिश्तों को आधुनिक संदर्भ में जोड़ना। आज सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और समाचार चैनल भारत और नेपाल के युवाओं को एक-दूसरे से जोड़ रहे हैं। वे “रोटी-बेटी” और “आस-भात” जैसे पारंपरिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाकर उन्हें जीवित रखते हैं।
साथ ही, मीडिया को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि वह किसी भी प्रकार की भ्रामक या नकारात्मक, फैंक न्यूज़ खबरों से इन संवेदनशील रिश्तों को प्रभावित न करे। जिम्मेदार पत्रकारिता इन भावनात्मक संबंधों को मजबूत करती है, जबकि गैर-जिम्मेदार रिपोर्टिंग उन्हें कमजोर कर सकती है।
अंततः, यह कहा जा सकता है कि मीडिया भारत नेपाल संबंधों का एक सशक्त स्तंभ है। “रोटी-बेटी” और “आस-भात” जैसे गहरे सामाजिक प्रतीकों को केंद्र में रखकर मीडिया यदि सकारात्मक, संवेदनशील, निष्पक्ष, संतुलित और जिम्मेदार भूमिका निभाए, तो दोनों देशों के बीच मित्रता, सहयोग और विश्वास को और अधिक गहरा किया जा सकता है, तथा भारत-नेपाल संबंध और भी अधिक सुदृढ़, आत्मीय और स्थायी बन सकते हैं।
भारत-नेपाल प्रेम की, जग में न्यारी बात,
रोटी-बेटी जोड़ती, दिल से दिल के साथ।
मीडिया बन सेतु जब, बढ़े भरोसा-मान,
आस-भात के भाव से, मजबूत हों संबंध महान।”

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