तीर्थ सेवा में उम्र कोई बाधा नहीं है…अष्टापद तीर्थ क्षेत्र महामंत्री कीर्ति पांड्या

(देवपुरी वंदना) हमारी आस्था, श्रद्धा, भक्ति का महा अद्भुत संगम हिमालय पर्वत श्रृंखला में कैलाश पर्वत के समीप 4800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र स्थल अष्टपद जैन धर्म समाज के लिए एक अत्यन्त महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है I यहाँ हर पहाड़ी और हर पत्थर को भगवान् तुल्य माना जाता है I यह पवित्र जैन तीर्थस्थल कैलाश पर्वत के बिल्कुल समीप है और यहाँ से कैलाश पर्वत का सबसे नज़दीक और सबसे मनोरम दृश्य भी दिखाई देता है

एक ओर संसार पाने, संग्रह करने और स्वार्थ की पूर्ति में लगा है, वहीं कुछ विरले लोग ऐसे भी होते हैं जो बिना किसी अपेक्षा, बिना किसी प्रसिद्धि की चाह और बिना किसी प्रतिफल की आशा के तीर्थ सेवा को अपना जीवन बना लेते हैं, जब कोई व्यक्ति नि:स्वार्थ भाव से, श्रद्धा और विश्वास के साथ किसी अच्छे संकल्प से जुड़ता है, तो जीवन को धन्य बना लेता है।

ऐसे ही हमारे अष्टापद तीर्थ के महामंत्री कीर्ति पांड्या विगत तीन-चार सालों से अष्टापद तीर्थ सेवा की सेवा को अपना लक्ष्य बना चुके हैं, धूप हो, ठंड हो, बर्फबारी हो या बारिश उनको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, तीर्थ पर यात्री को ठहरने, भोजन आदि का व्यवस्थित ख्याल रखना, तीर्थ पर निर्माण कार्य, तीर्थ पर श्रमण परंपरा के मुनिराज या माताजी का आगमन हो, सभी कार्यों को वे समर्पण के साथ निश्चल भाव से करते हैं, उनकी यह साधना तीर्थ के लिए मील का पत्थर साबित होगी ।

उनकी इस गौरवपूर्ण साधना का हम हृदय से अभिनंदन एवं वंदन करते हैं।
आदित्य कासलीवाल ✍🏻
अध्यक्ष
श्री दि. जैन सिद्धक्षेत्र अष्टापद तीर्थ बद्रीनाथ
