मोबाइल युग में संस्कारों का महाकुंभ” इन्दौर में 2000 बच्चों ने सीखा जैनत्व, डिजिटल तकनीक और श्रद्धा का अद्भुत संगम बना “यंग जैन स्टडी ग्रुप” का शिविर

इन्दौर। ( देवपुरी वंदना )‌ सुबह के ठीक 6:50 बजे…
छोटे-छोटे बच्चे हाथों में पूजन की थालियाँ लिए अनुशासित पंक्तियों में बैठे हैं।
णमोकार मंत्र की मधुर गूंज है, अभिषेक का अद्भुत दृश्य है ,अष्ट द्रव्य पूजन की श्रद्धा है।
पूरा वातावरण ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी विशाल पंचकल्याणक महोत्सव का दिव्य दृश्य साकार हो उठा हो।

यह कोई साधारण आयोजन नहीं था, बल्कि आधुनिक युग में संस्कारों की ऐसी अलख थी जिसने हर देखने वाले को भावविभोर कर दिया।
यंग जैन स्टडी ग्रुप द्वारा 3 से 10 मई 2026 तक सन्मति स्कूल, संयोगितागंज, इन्दौर में आयोजित जैन बाल एवं युवा संस्कार शिक्षण शिविर ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि दिशा सही हो तो आज की पीढ़ी धर्म और संस्कारों से दूर नहीं, बल्कि उन्हें सीखने के लिए उत्सुक है।

अमेरिका की विशेष नौकरी छोड़ समाज संस्कारों में जुटे पं. प्रकाश छाबड़ा 

माइक्रोसॉफ्ट अमेरिका का आकर्षक पैकेज और आधुनिक कॉर्पोरेट जीवन छोड़कर समाज और संस्कारों के लिए समर्पित छाबड़ा परिवार और पं. प्रकाश छाबड़ा का यह प्रयास आज एक विशाल संस्कार अभियान का रूप ले चुका है।

उनके मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर में 2200 से अधिक बच्चों और युवाओं ने स्वयं प्रेरित होकर ऑनलाइन पंजीयन कराया। इनमें से लगभग 2000 बच्चों युवाओं ने आठ दिनों तक अनुशासित वातावरण में जैनत्व के मूल संस्कार ग्रहण किए।

सबसे विशेष बात यह रही कि यह सहभागिता किसी दबाव से नहीं, बल्कि बच्चों और युवाओं की अपनी आंतरिक जिज्ञासा और श्रद्धा से उत्पन्न हुई थी।

जब 2000 बच्चों ने एक साथ किया अष्ट द्रव्य पूजन

प्रतिदिन प्रातः 5 बजे से ही शिविर की व्यवस्थाएँ प्रारंभ हो जाती थीं।
सन्मति स्कूल की लगभग 40 से अधिक बसें सुबह 5:30 बजे विभिन्न क्षेत्रों से बच्चों को लेकर शिविर स्थल पहुंचती थीं।

ठीक 6:50 बजे जिनेन्द्र अभिषेक और उसके पश्चात अष्ट द्रव्य पूजन प्रारंभ होता था।
श्री विमलचंद‌ जी छाबड़ा के मार्गदर्शन और मधुर स्वर की धनी श्रीमती जयश्री टोंग्या की वाणी में जब 2000 बच्चे एक साथ पूजन करते थे, तब दृश्य इतना भव्य होता कि हर व्यक्ति कुछ क्षणों के लिए मंत्रमुग्ध रह जाता।

ऐसा प्रतीत होता मानो नई पीढ़ी को केवल धर्म बताया नहीं जा रहा, बल्कि संस्कारों को उनके जीवन का उत्सव बनाया जा रहा हो।

जैन दर्शन के गूढ़ रहस्य बच्चों ने सहजता से सीखे

शिविर में बच्चों और युवाओं को लेवल वन से लेवल सेवन तक विभाजित कर जैनागम आधारित विषयों का आधुनिक शैली में अध्यापन कराया गया।

णमोकार मंत्र, पंच परमेष्ठी, भगवान तीर्थंकरों का स्वरूप, छह द्रव्य, सात तत्व, आठ कर्म, दश धर्म, चार गति, जीव-अजीव, भक्ष्य-अभक्ष्य, तीन लोक, रात्रि भोजन त्याग, छने पानी का महत्व, सेव्य-अनुसेव्य जैसे गंभीर विषयों को युवा विद्वानों और विषय विशेषज्ञों ने सरल भाषा और डिजिटल प्रस्तुति के माध्यम से समझाया।

लगभग 2000 बच्चों व युवाओं ने प्रत्यक्ष अध्ययन किया, जबकि सैकड़ों बच्चे यू-ट्यूब लाइव के माध्यम से जुड़े।

डिजिटल क्लासरूम में धर्म अध्ययन का नया प्रयोग 

पूजन और स्वल्पाहार के पश्चात साइरन बजते ही बच्चे उत्साहपूर्वक अपने-अपने कक्षों में पहुंच जाते थे।
सभी कक्ष डिजिटल तकनीक, प्रोजेक्टर और पीपीटी प्रेजेंटेशन से सुसज्जित थे।

शिक्षक पहले से तैयार रहते और बच्चे पूरे मनोयोग से नोट्स बनाते, प्रश्न पूछते और समाधान प्राप्त करते दिखाई देते।
कई कक्षाओं में ऐसा वातावरण था मानो कोई आधुनिक प्रोफेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहा हो, लेकिन विषय था — “जैनत्व और जीवन संस्कार”।

तकनीक बनी संस्कारों की सहयोगी 

शिविर की सबसे अनूठी विशेषता इसका डिजिटलीकरण रहा।
प्रत्येक शिविरार्थी का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, लेवल आधारित डेटा, उपस्थिति और परीक्षा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रखा गया।

बसों के आगमन और प्रस्थान की जानकारी सीधे अभिभावकों के मोबाइल पर भेजी जाती थी, जिससे हजारों बच्चों का संचालन अत्यंत व्यवस्थित ढंग से संभव हो पाया।

शिविर की समस्त अध्ययन सामग्री और व्याख्यान ऑनलाइन उपलब्ध कराए गए, ताकि बच्चे कभी भी और कहीं भी उन्हें पुनः देख सकें।
यह आधुनिक तकनीक और संस्कारों का ऐसा समन्वय था जिसने सभी को प्रभावित किया।

यह इन्दौर जैन समाज के लिए वरदान है

शिविर का अवलोकन करने पहुंचे अनेक सामाजिक, धार्मिक और औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख लोगों ने इसे “अद्भुत”, “अनुकरणीय” और “इन्दौर के लिए वरदान” बताया।

सांसद शंकर लालवानी , अशोक जैन (अरिहंत कैपिटल), अमित कासलीवाल, आनंद गोधा, भरत मोदी ,अशोक किरण जैन, सुनील मीना जैन, श्रीमती श्वेता संजय बंडी, नेहा पलाश बक्षी, अविनाश सेठी, विजित रामावत, श्रीमती निर्मला पहाड़िया, श्रीमती बिंदु निखिलेश पांड्या, श्रीमती सरोज सुरेश बडजात्या, नवीन-शिवानी गोधा, सुनील शाह, दिलीप दोषी, ‌ प्रमोद पहड़िया‌ , ज्ञानेश सिंघई, डॉ. हर्षल-दीप्ति शाह, श्रीमती श्वेता अरुणा बंडी, श्रीमती नेत्रा अपूर्व पालविया एवं श्रीमती अनीता वेद सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने शिविर पहुंचकर बच्चों का उत्साहवर्धन किया और व्यवस्थाओं की सराहना की।

आगंतुकों का कहना था कि मोबाइल और सोशल मीडिया के इस दौर में यदि हजारों बच्चे स्वेच्छा से धर्म, अनुशासन और संस्कार सीखने के लिए प्रतिदिन प्रातः उपस्थित हो रहे हैं, तो यह समाज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।

कार्यकर्ताओं के समर्पण ने रचा सफलता का इतिहास

शिविर की भव्य सफलता के पीछे यंग जैन स्टडी ग्रुप के समर्पित कार्यकर्ताओं की अथक मेहनत और सेवा भावना रही।

प्रीतेश जैन, अजय नीतू जैन, अजय मिंटा जैन, आमोद पहाड़िया, अमन जैन, रोहित जैन, तरुण जैन, श्रीमती खुशबू जैन, अंशुल जैन, अरिहंत जैन, अखिलेश रिंकल जैन, नरेश जैन, रितेश जैन, प्रमोद पहाड़िया, महेश जैन, आशीष जैन, श्रीमती सृष्टि जैन, श्रीमती किरण जैन ,मुकेश जैन मामाजी,निलेश पाटोदी,राजकुमार जैन,आलोक जैन,दिनेश दिवाकर,पारस जैन,राजेश वेद,मुकेश बज, वीरेन्द्र जैन वीरू सहित यंग जैन स्टडी ग्रुप के अनेक कार्यकर्ताओं ने पूरे आठ दिनों तक व्यवस्थाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनकी सेवा, अनुशासन और समर्पण ने इस शिविर को एक आदर्श आयोजन का स्वरूप प्रदान किया।

समापन पर प्रतिभाओं का सम्मान और आगामी वर्षों  के  की  घोषणा*

10 मई रविवार को आयोजित समापन समारोह में प्रत्येक लेवल के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
सामूहिक भोज हुआ, पुनः शिविर में आने के संकल्प और जैनत्व के संस्कारों को जीवन में उतारने की प्रेरणा के साथ शिविर का भावपूर्ण समापन हुआ।

पं. प्रकाश छाबड़ा ने घोषणा की कि आगामी संस्कार शिविर
3 मई से 10 मई 2027
1 मई से 9 मई 2028
1 मई से 9 मई 2029
तक आयोजित किए जाएंगे।
पंजीयन की अंतिम तिथि प्रत्येक वर्ष 20 अप्रैल रहेगी।

नई पीढ़ी में संस्कार जागरण का महाअभियान
विगत ग्यारह वर्षों से निरंतर संचालित यह शिविर अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नई पीढ़ी में संस्कार जागरण का महाअभियान बन चुका है।
जहां एक ओर आधुनिकता बच्चों को स्क्रीन तक सीमित कर रही है, वहीं दूसरी ओर इन्दौर में हजारों बच्चे डिजिटल तकनीक के माध्यम से धर्म, अनुशासन, संयम और जैनत्व का पाठ सीख रहे हैं।
यह दृश्य केवल प्रेरणादायक नहीं, बल्कि समाज के लिए आश्वस्ति का संदेश भी है कि संस्कारों की धारा आज भी जीवित है — और नई पीढ़ी उसे पूरे उत्साह से स्वीकार कर रही है।

राजेन्द्र जैन “महावीर”  सनावद
वीरेन्द्र जैन ‘वीरु’, इन्दौर✍🏽

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