महावीराचार्य -2026 पुरस्कार इंदौर की डॉ. प्रगति जैन को 03 अप्रैल 26 अयोध्या में भव्य सम्मान समारोह आयोजित

इंदौर ! (देवपुरी वंदना )
परम पूज्य, गणिनी प्रमुख 105 आर्यिका श्री ज्ञानमती माता जी की पावन प्रेरणा से जैन गणित के क्षेत्र में उत्कृष्ट अनुसंधान कार्य हेतु विगत 2020 में दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, हस्तिनापुर द्वारा डॉ. अनुपम जैन परिवार के सौजन्य से घोषित महावीराचार्य पुरस्कार 2021 से सतत प्रदान किया जा रहा है जिसमें अब तक
प्रो. राधाचरन गुप्त, झांसी (2021)
प्रो. सुरेशचन्द्र अग्रवाल, मेरठ, (2022)
प्रो. श्रेणिक कुमार बंडी, इन्दौर, (2023)
प्रो. पद्मावथम्मा, मैसूर, (2024)
श्री रत्न कुमार शिवलाल शाह, पुणे (2025)

जैन गणित एवं महावीराचार्य :
गणित इतिहास के अन्तर्गत धर्मानुसार अध्ययन की भी परम्परा रही है। इसी श्रृंखला में Vedic Mathematics, Hindu Mathematics, Modern Mathematics in Applied Buddhism, Muslim Contribution to Mathematics जैसी कृतियाँ प्रकाशित हुई है। जैन धर्म / दर्शन के प्राचीन ग्रंथों में विषयों के विवेचन में गणित का साधन के रूप में प्रयोग किया गया है। फलतः इनमें समकालीन गणित विषय का विपुल ज्ञान उपलब्ध है। कालान्तर में इस ज्ञान को सरल एवं बोधगम्य बनाने एवं जिज्ञासुओं को प्रशिक्षित करने हेतु स्वतंत्र गणितीय ग्रंथों का भी सृजन किया गया। जैन परम्परा में उपलब्ध इस प्रकार के समस्त ज्ञान को ही Jaina Mathematics, Jaina School of Mathematics, Jaina School of Indian Mathematics या जैन गणित कहा जाता है। यह गणित इतिहास की अत्यन्त महत्त्वपूर्ण शाखा है एवं इसके अध्ययन के बिना भारतीय गणित या भारतीय ज्ञान परम्परा का अध्ययन अपूर्ण ही रहेगा। मात्र इतना ही नहीं यह करणा नुयोग / द्रव्यानुयोग का एक अविभाज्य अंग होने के कारण जैन साहित्य के अध्ययन हेतु भी अपरिहार्य रूप से आवश्यक है।
वर्ष 2026 के पुरस्कार हेतु संस्थान के अध्यक्ष पीठाधीश रवीन्द्र कीर्ति स्वामी जी की अध्यक्षता में चयन समिति गठित की गई हैं :
प्रो. रेणु जैन, पूर्व कुल गुरू, दिल्ली, सदस्य प्रो. एस. सी. अग्रवाल, पूर्व पुरस्कृत विद्वान, मेरठ, सदस्य प्रो. अनुपम जैन, प्रायोजक, इन्दौर, चयन समिति की सर्वसम्मत अनुशंसा के आधार पर महावीराचार्य पुरस्कार 2026 हेतु डॉ. प्रगति जैन, इन्दौर का चयन किया गया है। संयोजक प्रायोजक एवं आयोजक डॉक्टर अनुपम जैन की ज़ुबानी आपको सादर आमंत्रण:

प्रगति के पथ पर प्रगति की ओर अग्रसर
डॉ. प्रगति जैन अखिल भारतीय जैन पत्र संपादक संघ (महिला प्रकोष्ठ) राष्ट्रीय अध्यक्ष ने वर्ष 1997 में विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन से गणित में एम.एस. सी. प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की तथा वर्ष 2007 में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से ‘आचार्य वीर सेन एवं उनका गणितीय अवदान’ विषय पर पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की। आप मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा चयनित होकर वर्तमान में मध्य प्रदेश शासन के अंतर्गत इंदौर के शासकीय महाविद्यालय में सहा. प्राध्यापक एवं गणित विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं तथा म.प्र. की सेंट्रल बोर्ड ऑफ स्टडीज-गणित की सदस्य हैं।
डॉ. जैन का शैक्षणिक और शोध योगदान अत्यंत उल्लेखनीय है। अब तक वे 13 पुस्तकों का लेखन कर चुकी हैं तथा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में उनके 70 से अधिक शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उनके मार्गदर्शन में चार शोधार्थियों ने पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। गणितीय नवाचार की दिशा में उनके नाम तीन पेटेंट पंजीकृत हैं, जो उनकी मौलिक शोध-दृष्टि और वैज्ञानिक चिंतन का प्रमाण हैं। भारतीय गणित पर आधारित उनकी शोध परियोजना को नई दिल्ली स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ फिलॉसॉफिकल रिसर्च (ICPR) द्वारा स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने भारत का गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व किया है। कुआलालंपुर (मलेशिया), जापान और लंदन जैसे वैश्विक मंचों पर उन्होंने भारतीय गणित और जैन दर्शन की वैज्ञानिक परंपरा को प्रस्तुत किया। लंदन मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में उन्हें Best Paper Award से सम्मानित किया गया, जिसने भारतीय दर्शन की वैज्ञानिक प्रासंगिकता को विश्व पटल पर स्थापित किया।
शिक्षा और शोध के साथ-साथ वे एक प्रभावशाली वक्ता और सक्रिय समाजसेवी भी है। प्राचीन भारतीय गणित पर उनके विशेषज्ञ व्याख्यान तथा वीडियो श्रृंखला मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। उनके लेख विभिन्न समाचार पत्र – पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं। अपने उल्लेखनीय योगदानों के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है, जिनमें डॉ. सी. वी. रमन विज्ञान लेखन पुरस्कार, मध्य प्रदेश गौरव रत्न पुरस्कार, कुंदकुंद ज्ञानपीठ और नारी शक्ति पुरस्कार आदि ! महावीराचार्य 2026 :
पुरस्कार समर्पण समारोह, 03 अप्रैल 2026 को श्री दि. जैन तीर्थ, बड़ी मूर्ति – रायगंज-अयोध्या (उ. प्र.) में मध्याह्न 2.00 से 4.00 के मध्य परम पूज्य गणिनी 105 प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संसघ सान्निध्य में आयोजित किया जा रहा है। आप सभी आमंत्रित हैं !

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