पटाखे ना फोड़ने का हस्ताक्षर संकल्प अभियान ‌‌- 2022 ”अहिंसा परमो धर्म””

प्रातः स्मरणीय संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महा मुनिराज के परम प्रभावक शिष्य प्रखर वक्ता श्री 108 संधान सागर जी महाराज जी की पावन प्रेरणा से दीपावली पर्व पर सूक्ष्म जीवों की रक्षा हेतु पटाखे का इस्तेमाल ना करने हेतु हस्ताक्षर संकल्प अभियान चलाया जा रहा हे।
आप सभी से नम्र निवेदन है की आप सभी अपनी अहम भूमिका निभाए और उपर दिए गए फॉर्म को आप स्वयं भी भरे, परिवार के सभी सदस्यों से भी भरवाएं और आपके परिचितों से भी भरवाएं जैसे कि( कार्यालय कर्मचारी, घर दुकान के कर्मचारी, दोस्त, पड़ोसी,रिश्तेदार आदि) वालों से भी भरवाएं उनसे प्रतिज्ञा करवाएं की इस वर्ष वे पटाखें ना जलाएं और मानवता के इस धार्मिक संयोजन में अपनी अहम भूमिका निभाये ।
ये हमारे लिए भी बहुत जरूरी है क्योंकि हमने देखा हे corona से बहुत से लोगों की जान गई है और बहुत से लोगों को corona के बाद भी श्वास की बीमारी से लड़ना पद रहा है। ऐसे में पटाखों का धुंआ ठीक होने वाले corona patient , Asthama
patients
के लिए और हमारे लिए भी हानिकारक हैं। ये सभी के मंगल स्वास्थ्य के लिए बेहद ज़रूरी है।
आप को संकप करने के बाद आपको “दयोदय अहिंसा गौरव” उपाधि प्रदान किया जाएगा।
इस लिंक पर संकल्प पत्र है जिसे जरूर भरें। आप का एक नियम करोड़ो जीवों की २क्षा करेगा ।

https://forms.gle/Ye6GDntpmXRSFa1C9

पटाखों के कारण होने वाले प्रदूषण

हर कोई पटाखों के द्वारा उत्पन्न होने वाले शानदार रंगो और आकृतियों से प्यार करता हैं।
पटाखों में मुख्यतः सल्फर के तत्व मौजूद होते हैं।
पटाखों से निकलने वाले रसायन सभी के लिए हानिकारक होते हैं।
ये रासायन अल्जाइमर तथा फेफड़ो के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां का कारण बन हैं ।
केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के 2015 राष्ट्रीय गुणवत्ता सूचकांक के आकड़ो से दिल्ली में ही यह आकड़ा PM 10 तक पहुंच जाता है जोकि स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक हैं।
आतिशबाजी द्वारा बेरियम नाइट्रेट श्वसन संबंधी विकार, मांसपेशियों की कमजोरी और हार्मोनल असंतुलन आदि जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं।
पटाखों में पोटेशियम, सल्फर, कार्बन, एंटीमोनी, बेरियम नाइट्रेट, एल्यूमीनियम, स्ट्रोंटियम, तांबे और लिथियम जैसे तत्व होते हैं।
नतीजतन, दिवाली के त्योहार के दौरान कई सारे बड़े शहरों के वायु की गुणवत्ता काफी खराब हो जाती

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