एक धडे के ताजा-ताजा बने पदाधिकारी के युवाओं की इंदौर (सामाजिक संसद) के प्रति उनकी सोच इमेज से दर्शाती है..

इंदौर! (देवपुरी वंदना) इंदौर दिगंबर जैन समाज के चुनाव किस स्तर तक जा रहे हैं यह तो प्रचार – प्रसार से ही लग रहा है मतलब नाम पद की लालसा समाज सेवी कहलाने वाले कितनी हद पार कर सकते हैं यह तो उनकी सोच इमेज के द्वारा दर्शा रही है! अगर समाज में ऐसे व्यक्ति अपने कुल,परिवार की संस्कार – संस्कृति का असर व अपने मान – सम्मान मर्यादा का
महत्व बता रहा है ?
एक और बंद कमरे में बनी संसद को आप उचित ठहराते हुए उसमें पदाधिकारी बने हो वहीं दूसरी ओर खुलकर बन रही चुनाव जिसने आप स्वयं प्रत्याशियों को जीता ने के लिए संस्कार संस्कृति की पहचान बन रही सांसद मैं भी गलतियां निकल रहे हैं चलो गलतियां तो ठीक है मगर एक धार्मिक , सामाजिक स्तर की सभी सीमा लांघ कर अपने जैन समाज के प्रति आपका लगाओ इतना निचले स्तर तक मत जाने दो कि
इंदौर स्थानीय जैन समाज से उठकर प्रदेश या राष्ट्रीय संस्था भी आपका तिरस्कार करने लगे यह बात तो आप जानते होंगे कि समाज बोलना नहीं है करके दिखाता है !
बाकी जिसकी जैसी सोच
देवपुरी वंदना समाचार परिवार का सभी ताजा-ताजा बने पदाधिकारी और पूर्व नये अध्यक्षों से भी निवेदन है कि वह भी इस चुनाव में हिस्सा लेकर
आपके मन चाहे प्रत्याशी को जीता ले मगर ऐसी औछी न करे! कम से कम अपना नहीं तो अपने परिवार व बच्चों के बारे में सोच कर देखें आपका आज का लालच भरा निर्णय उन्हें क्या शिक्षा दे रहा है
