मुनिश्री108 विजयानंद महाराज की तपोस्थली बोलखेड़ा में हुई समाधि
बॉलखेड़ा !(मनोज नायक) जैन दर्शन के अनुसार मृत्यु को महोत्सव के रूप में आयोजित किया जाता है । जिसे उत्तम समाधि मरण कहा जाता है। प्रत्येक श्रमण व श्रावक यही भावना भाता है कि उसका अंत समय गुरु चरणों मे समाधि मरण के साथ हो। जैन सन्त…
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