नाम,पद के महत्वाकांक्षीयो द्वारा मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी के कंधों का भी उपयोग करने में देरी…
इंदौर ! (देवपुरी वंदना) सर्व विदित है कि अपनी महत्वाकांक्षा नाम, पद, मंच,माला की लालसा मानव को अच्छे बुरे की सोच से बहुत दूर ले जाता है! और सिर्फ अपने फायदे की जुगाड़ में ही लीन रहता है चाहे वह किसी भी रास्ते का उपयोग करता है या करने के…
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