राष्ट्रहित के लगाव में जैन परंपरा व संस्कार, संस्कृति, के साथ अवमानना क्यों….?
इंदौर ! (देवपुरी वंदना ) धर्म ,समाज, संस्कार, संस्कृति ,परंपरा की रक्षा -सुरक्षा का जिम्मा क्या आम जनमानस के लिए ही रहती है ? आज हम जिन्हें अपने समाज धर्म परंपरा का आधार स्तंभ मानते हैं या कहते हैं। आज अगर वह स्वयं ही किसी…
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