सागवाड़ा में आचार्य श्री 108 शांति सागर जी (छाणी) समाधि स्थली के जीर्णोद्धार हेतु भूमि पूजन समारोह संपन्न

 

 

सागवाड़ा। ( देवपुरी वंदना ) प्रशम मूर्ति आचार्य श्री 108 शांतिसागर (छाणी वाले ) महाराज की पावन समाधि स्थली के जीर्णोद्धार कार्य के शुभारंभ हेतु विगत दिवस बारिश की रिमझिम अमृत बूंद के मध्य प्रातः छोटी नसिया, सागवाड़ा (राजस्थान) में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भूमि पूजन समारोह संपन्न हुआ।
समाधि स्थली के जीर्णोद्धार की प्रेरणा भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी से प्राप्त हुई। कार्यक्रम का मार्गदर्शन आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष समिति के अध्यक्ष हसमुख जैन गांधी (इंदौर) ने किया।

आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष प्रारम्भ से पहले पूर्ण होगा जीर्णोद्धार : हसमुख गांधी

अध्यक्ष हसमुख जैन गांधी ने कहा कि आचार्य शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष के औपचारिक शुभारंभ से पूर्व ही समाधि स्थल का जीर्णोद्धार पूर्ण करने का संकल्प लिया गया है। पूज्य आर्यिका रत्न 105 श्री स्वस्ति भूषण माताजी की पावन प्रेरणा से प्रारंभ हुए इस कार्य का उद्देश्य समाधि स्थल को विश्वस्तरीय स्वरूप प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि आगामी एक वर्ष तक देशभर में आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष के विविध कार्यक्रम आयोजित होंगे तथा आचार्य शांतिसागर जी महाराज के तप, त्याग एवं आदर्शों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। हमारा प्रयास है कि यह समाधि स्थल देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्थल के रूप में विकसित हो।

विश्वस्तरीय स्वरूप में विकसित होगी

समाधि स्थली दिनेश खोड़निया
समारोह में जैन समाज के वरिष्ठ नेता एवं राजस्थान सरकार के पूर्व राज्य मंत्री  दिनेश खोड़निया ने चरण-छत्री स्मारक एवं समाधि स्थली के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आचार्य शांतिसागर जी महाराज समाज के गौरव थे। उन्होंने सागवाड़ा में मुनि दीक्षा ली और दो चातुर्मास भी किए तथा यहीं समाधि को प्राप्त हुए। इसलिए यह स्थान संपूर्ण जैन समाज की अमूल्य धरोहर है।
समिति के महामंत्री ज्ञानेंद्र जैन (जहाजपुर) ने कहा कि समाधि स्थल के जीर्णोद्धार में धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। सागवाड़ा समाज के सहयोग से इस कार्य को सर्वोत्तम रूप दिया जाएगा।
इस अवसर पर राजेन्द्र जैन महावीर ने कहा कि आचार्य शांतिसागर जी महाराज उत्तर भारत में दिगम्बर जैन परंपरा के पुनर्जागरण के महानायक थे। सागवाड़ा से उनका संबंध इस नगर एवं समाज के लिए गौरव का विषय है। उनका जीवन-दर्शन आज भी संपूर्ण समाज को धर्म, त्याग और साधना की प्रेरणा देता है।
शताब्दी वर्ष समारोह समिति के मंत्री शरद पानोत ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समाज के वरिष्ठजनों ने समाधि स्थल को भव्य स्वरूप देने तथा वहां गुरु मंदिर के निर्माण के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए। महिला नेत्री  साधना कोठारी एवं समाज के सेठ महेश नोगामिया ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन दिनेश खोड़निया ने किया। समारोह के उपरांत सभी श्रद्धालुओं ने छोटी नसिया स्थित सभी समाधियों के दर्शन किए तथा अल्प समय में हुए विकास कार्यों के लिए सागवाड़ा समाज एवं समिति का आभार व्यक्त किया।
सागवाड़ा से शुरू हुई तप परंपरा, आज 225 से अधिक संत कर रहे धर्म प्रभावना :
उल्लेखनीय है कि आचार्य शांतिसागर छाणी जी महाराज ने वर्ष 1923 में सागवाड़ा की पावन भूमि पर मुनि दीक्षा ग्रहण की थी। वर्ष 1926 में बिहार के गिरिडीह में चातुर्मास के दौरान उन्हें आचार्य पद से विभूषित किया गया। उन्होंने दिगम्बर जैन परंपरा के पुनर्जागरण में ऐतिहासिक योगदान दिया। आज उनके शिष्य-प्रशिष्य की गौरवशाली परंपरा पूरे देश में धर्म प्रभावना कर रही है। वर्तमान में उनकी शिष्य परंपरा के 225 से अधिक दिगम्बर जैन संत-साध्वियाँ देश-विदेश में जैन धर्म, तप, संयम एवं अहिंसा का संदेश जन-जन तक पहुँचा रहे हैं। इसी गौरवशाली परंपरा के सम्मान एवं संरक्षण के उद्देश्य से सागवाड़ा स्थित उनकी समाधि स्थली का भव्य जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
इस अवसर पर श्री समाज सागवाड़ा के सेठ महेश नोगामिया, जीर्णोद्धार समिति के अध्यक्ष आदिश खोड़निया, ट्रस्टी अश्विन बोवड़ा, संतोष खोड़निया, रितेश कोठारी, राजेंद्र पंचोली एवं दिनेश मेहता सहित समस्त पंच महाजन, दशा हूमड़ दिगम्बर जैन समाज एवं आचार्य शांतिसागर जी स्मारक स्थली समिति के पदाधिकारी के साथसमारोह में  नटवरलाल मुंशी, राजमल शाह, कन्हैयालाल मेहता, नरेंद्र खोड़निया, कीर्ति शाह, डॉ. राजकुमार, साधना कोठारी, विजयकुमार जैन, डॉ. राजकुमार दोसी, वनिता शाह, हिरेन खोड़निया, अमित खोड़निया, निकुंज वरवारिया, चिराग बोवड़ा, अनिरुद्ध शाह, विनय सेठ, मितेश शाह, हितेन्द्र सारगिया, दिलीप जैन, हेमंत शाह, कान्तिलाल बोवड़ा, पंडित जनक जैन, हेमंत मेहता, महावीर प्रसाद जैन, लक्ष्मीलाल टोंग्या, देवीलाल जैन जमौली, शरद पानोत, राजेन्द्र जैन महावीर, रजनीश जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
समारोह के अंत में सभी ने आचार्य शांतिसागर छाणी जी महाराज के तप, त्याग एवं आध्यात्मिक अवदान का स्मरण करते हुए समाधि स्थली के शीघ्र एवं भव्य जीर्णोद्धार की मंगलकामना की तथा धर्म प्रभावना के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
राजेन्द्र जैन “महावीर”
सनावद ✍🏻
9407492577

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.