प्राकृत ज्ञान केसरी, चर्या चक्रवर्ती, मुनिकुंजर ज्येष्ठाचार्य आदि सागर जी (अकंलीकर) परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश 108 आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ससंघ का भव्य चातुर्मास इंदौर शहर में

इंदौर ! (देवपुरी वंदना) चातुर्मास (जिसे वर्षा योग भी कहा जाता है) वर्षा ऋतु के चार महीनों (सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक) जुलाई ,अगस्त, सितंबर, अक्टूबर ,नवंबर का पवित्र समय है, जिसमें सभी जैन साधु- साध्वियाँ एक ही स्थान पर स्थिरवास करते हैं चातुर्मास से उद्देश्य और महत्व: वर्षा ऋतु में जमीन पर असंख्य सूक्ष्म जीव और छोटे पौधे उत्पन्न हो जाते हैं जीवों की रक्षा (अहिंसा) और अपनी आत्मिक साधना के लिए संत गण विहार (यात्रा) रोककर एक निश्चित स्थान पर रुकते है यह समय तप, त्याग, साधना, आराधना, संयम और स्वाध्याय के लिए उत्तम माना जाता है अवधि: चातुर्मास का आरंभ प्रायः जुलाई – अगस्त में देवशयनी एकादशी या आषाढ़ पूर्णिमा से होता है और यह कार्तिक मास दीपावली तक चलता है श्रावक और श्राविका ओ के लिए: गृहस्थ जीवन वाले जैन अनुयायी इन चार महीनों में विशेष रूप से धार्मिक अनुष्ठान, उपवास, सामायिक और ध्यान करते है !

मध्य प्रदेश की औद्योगिक राजधानी इंदौर शहर स्थित जैन कॉलोनी (नेमीनगर) में वर्ष – 2026 का भव्य ,ऐतिहासिक चातुर्मास
प्राकृत ज्ञान केसरी, व्याख्यान वाचस्पति, चर्या चक्रवर्ती
मुनिकुंजर ज्येष्ठाचार्य आदि सागर जी (अंकलीकर) परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश परम पूज्य आचार्य श्री 108 सुनील सागर जी महाराज लगभग 60 पीछी और प्रतिमा धारी भैया जी, दीदी के ससंघ चलते फिरते श्रमण परंपरा के रक्षार्थ गुरुवर आगामी रविवार 2 अगस्त को मंगल कलश स्थापना कर 8 नवंबर दीपावली तक 99 दिवसीय इंदौर ही नहीं निकटतम सभी प्रदेशों के श्रावकों -श्राविकाओ के साथ रिमझिम फुहार के साथ अपना मानवीय जीवन सफल करेंगे!
प्रारंभिक जीवन
जन्म: 7 अक्टूबर 1977 को
मध्यप्रदेश के सागर जिले के तिगोड़ा गाँव में हुआ गृहस्थ
आपका लौकिक (गृहस्थ) नाम श्री संदीप जैन रहा है
पिता का नाम श्री भागचंदजी जैन माता का नाम श्री मती मुन्नी देवीजी है।
शिक्षा: आपने बी.कॉम. और संस्कृत में शास्त्री तक की उच्च शिक्षा प्राप्त की है
आध्यात्मिक दीक्षा गुरु: आपको दिगंबर जैन संत ‘तपस्वी सम्राट’ आचार्य श्री 108 सन्मति सागर जी महाराज से दीक्षा प्राप्त हुई।
सांसारिक मोह-माया त्यागकर आपने मुनि दीक्षा ग्रहण की।प्रमुख उपलब्धियाँ और कार्य विशाल संघ: आप विशाल मुनि संघ का नेतृत्व करते हैं और आप के सान्निध्य में कई मुनि श्री और आर्यिकाएं साधना कर रहे हैं।दीक्षा और संस्कार: आचार्य सुनील सागर जी अब तक 160 से अधिक साधुओं को दीक्षा प्रदान कर चुके हैं।
सल्लेखना: आप ने अपने जीवनकाल में 70 से अधिक को जैन धर्म की सर्वोच्च परंपरा ‘सल्लेखना’ (समाधि मरण) पूर्ण कराई है।आपके प्रवचन मुख्य रूप से जैन ग्रंथों, जैसे ‘प्रवचनसार’ पर केंद्रित होते हैं, जिसका उद्देश्य लोगों को सम्यक दर्शन और ज्ञान की प्राप्ति कराना है। आप ससंघ विहार और धर्म – सभाओं के माध्यम से देश भर के जैन अनुयायियों को मार्गदर्शन मिलता है।

गुरुदेव के संघघ में मुनिश्री एवं साध्वी माताजी के नाम :
मुनि श्री108 सुकुमाल सागरजी,
मुनि श्री108 सिद्धार्थ सागरजी,
मुनि श्री 108 सम्बुद्ध सागरजी,
मुनि श्री 108 सवर्थि सागरजी,
मुनि श्री 108 अजीत सेन सागरजी, मुनि श्री 108 संतृप्त सागरजी, मुनि श्री 108 संपूज्य सागरजी,मुनि श्री 108 संप्रज्ञ सागरजी, मुनि श्री 108 संविज्ञ सागरजी, मुनि श्री 108 सुविवेक सागरजी, मुनि श्री 108 सुविशुद्ध सागरजी, मुनि श्री 108 शांतनु सागरजी, मुनि श्री 108 सुतनु सागर जी, मुनि श्री 108 सुमनु सागर जी, क्षुल्लक श्री 105 विजयन्त सागरजी,क्षुल्लक श्री 105 सुखद सागरजी,क्षुल्लक श्री 105 सुनिश्चय सागरजी,
क्षुल्लक श्री 105 संतुष्ट सागरजी,क्षुल्लक श्री 105 संतोष सागरजी, क्षुल्लक श्री 105 सुराज सागरजी,
क्षुल्लक श्री 105 सुप्रक्ष सागरजी, और
आर्यिका श्री 105 आद्य मति माताजी, आर्यिका श्री 105 आराध्य मति माताजी,आर्यिका श्री 105 आकाश मति माताजी,
आर्यिका श्री105 सदृढ़ मति माताजी,आर्यिका श्री 105 सुस्वर मति माताजी,आर्यिका श्री 105 अनघ मति माताजी,
आर्यिका श्री105 संयत मति माताजी,आर्यिका श्री 105 संगीत मति माताजी,आर्यिका श्री 105 आर्यिका सम्पूर्ण मति माताजी,आर्यिका श्री 105 सम्पन्न मति माताजी,आर्यिका श्री105 सम्बल मति माताजी,
आर्यिका श्री 105 सुलेख मति माताजी,आर्यिका श्री 105 श्रुतज्ञ मति माताजी, क्षुल्लिका श्री105 अमोह मति माताजी,क्षुल्लिका श्री 105 अजय मति माताजी, क्षुल्लिका श्री 105 शुद्धात्म मति माताजी, क्षुल्लिका श्री 105 पद्ममति माताजी,क्षुल्लिका श्री 105 सदृष्टि मति माताजी,
क्षुल्लिका श्री105 सतपो मति माताजी, क्षुल्लिका श्री105 सद्बोध मति माताजी, क्षुल्लिका श्री 105 सव्रतमति माताजी,
क्षुल्लिका श्री 105 संभाव मति माताजी, क्षुल्लिका श्री 105 संरक्ष मति माताजी,
क्षुल्लिका श्री 105 सूरज मति माताजी,क्षुल्लिका श्री 105 सुगम्ध मति माताजी,क्षुल्लिका श्री 105 सुकृत मति माताजी,
क्षुल्लिका श्री 105 सुमनो मति माताजी, क्षुल्लिका श्री 105 अलीप्त मति माताजी, आदि के साथ प्रतिमाधारी भैया जी और दीदी और लाखों की संख्या में श्रावक – श्राविकाएं अपने मानवीय जीवन की सामाजिक, धार्मिक पारिवारिक, संस्कार, संस्कृति आस्थाओं को अपना रहे हैं !
विस्तृत जानकारी के लिए
संपर्क करें ::
श्री1008 दिगम्बर जैन समाज जैन कॉलोनी ( नेमीनगर ) इंदौर
चातुर्मास (प्रमुख संयोजक: इंद्र कुमार सेठी , 93032 43347)
(अध्यक्ष: कैलाश लुहाड़िया, 9425350981)
(महामंत्री: गिरीश पाटोदी
9826061345)
