एन.सी.ई.आर.टी.) ने कक्षा 9 की संस्कृत पाठ्यपुस्तक ‘शारदा’ में “नवकार महामंत्र ” शामिल किया

नई दिल्ली। (देवपुरी वंदना) सृष्टि का सबसे प्राचीन जैन धर्म के प्रमुख मंत्र ‘नवकार महामंत्र’ को स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम में समाहित किया गया है।
नेशनल काउंसिल फॉर एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एन.सी.ई.आर.टी.) ने कक्षा 9 की संस्कृत पाठ्य पुस्तक ‘शारदा’ में यह मंत्र शामिल किया है।
णमो अरिहंताणं’ से प्रारंभ होने वाला जैन धर्म एवं जीवन दर्शन की मूल आत्मा का प्रतिनिधित्व करने वाला यह मंत्र समस्त पापों के विनाश तथा आत्मशुद्धि के जरिए मोक्ष मार्ग की तरफ प्रवृत्त करने का शसक्त माध्यम माना जाता है।
जैन समाज के प्रमुख लोगों, सामाजिक नेतृत्व और सम्मानित लोगों ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में समाहित करने की दिशा में नवकार महामंत्र को
भी समाहित किए जाने को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जीतो एपेक्स के चेयरमैन पृथ्वीराज कोठारी के नेतृत्व में नई दिल्ली में आयोजित नवकार महामंत्र दिवस समारोह (9 अप्रैल) को इस बार देश के गृह मंत्री अमित शाह और पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए थे। अभिनव कर महामंत्र को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर समाज में खुशी की लहर है। शिक्षाविदों और धर्माचार्यों के अनुसार, नवकार महामंत्र के बारे में भारत सरकार का यह निर्णय केवल एक जैन धार्मिक मंत्र को पाठ्यक्रम में जोड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा के बहुलतावादी स्वरूप को स्वीकार करने का सशक्त प्रयास भी है। नवकार महामंत्र किसी एक तीर्थंकर या व्यक्तित्त्व विशेष की स्तुति नहीं करता, बल्कि यह समस्त अरिहंतों, सिद्धों, आचायों, उपाध्यायों और साधु-साध्वियों के गुणों को नमन करने की प्रार्थना है। कहने को भले ही नवकार महामंत्र जैन धर्म से जुड़ा है लेकिन वास्तव में यह मंत्र सभी लोगों को गुणों के प्रति श्रद्धा और आत्मविकास की प्रेरणा देता है, जो संसार के सभी मनुष्यों पर लागू होता है।
आम तौर पर माना गया है कि हमारे भीतर किशोरावस्था में ही नैतिकता, संयम और सह-अस्तित्व जैसे मूल्यों का विकास अत्यंत शीघ्र होता है, जो जीवन भर सदा साथ रहता है। इसीलिए एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के तहत कच्ची उम्र में नवकार महामंत्र का अध्ययन विद्यार्थियों को आध्यात्मिक संतुलन, आत्म अनुशासन और अहिंसा जैसे सिद्धांतों से परिचित कराएगा। जैन धर्म की सत्य, अहिंसा और जीवदया की शिक्षाएं आज के समय में सर्वाधिक प्रासंगिक है।
जैन समाज ने इस पहल का स्वागत किया है।
