इंदौर सामाजिक संसद ने महावीर जन्म कल्याण महोत्सव पर मुनि श्री 108 पूज्य सागर जी से प्रवचन करवाना भी उचित नहीं समझा ?
इंदौर ( देवपुरी वंदना ) ! आज सभी को विदित है कि श्रमण परंपरा ही दिगंबरत्व व जैन संस्कार, संस्कृति, की रक्षार्थ के लिए प्रथम पंक्ति में आज भी अपना दायित्व निभा रही है। चाहे किसी तरह की शारीरिक पीड़ा से क्यों नहीं गुजरना पड़ता है। विगत 19 दिनों से शहर में प्रथम तीर्थंकर श्री 1008 आदिनाथ जन्म कल्याण महोत्सव से लेकर विगत दिवस महावीर जन्म कल्याण तक शहर की विभिन्न कालोनियों मे धर्म प्रभावना बहुत अच्छी व सराहनीय रही, फिर अंतिम दिवस पर ऐसा क्या वातावरण बना की मुनि श्री 108 पूज्य सागर जी हमारी प्राचीन धरोहर कांच मंदिर से निकाली शोभायात्रा जिसमें मुनि श्री स्वयं शामिल होकर धर्म प्रभावना कर रहे हैं पुन: शोभा यात्रा के वापसी पर कांच मंदिर प्रांगण पर अभिषेक की पौराणिक परंपरा के पूर्व वहां विराजमान श्रमण परंपरा के सभी दिगम्बरत्व चर्या को श्रावक – श्राविकाओं को आशीर्वचन व पौराणिक चली आ रही महोत्सव पर्व की परंपरा व विशेषताएं बताने का आयोजको का निवेदन सर्व विदित है । वर्ष भर में देखा जाए तो यह आयोजन एक बार ही होता है जिसकी तैयारी में हमें समय भी मिलता है फिर विगत दिवस महावीर जन्म कल्याण पर ऐसी क्या बात रही जो निमंत्रित व स्वीकृति प्राप्त श्रवण परंपरा का इस तरह अपमान किया गया ? चाहे स्थिति किसी भी कारण से कुछ भी बने फिर जिम्मेदार व्यक्ति विशेष समय से पूर्व क्यों नहीं जागते या जिम्मेदार गण आम श्रावक – श्राविकाओं की भावनाओं, श्रद्धा , भक्ति को अपनी मनमानी की दुकान समझ लेते हैं। पुन: ऐसी नाम, पद, मंच माला की चाह में किसी की आस्था भक्ति श्रद्धा पर पुनरावृत्ति ना हो इसी उम्मीद के साथ !! क्षमा श्री !!