मुरैना में साधर्मी बंधुओं के लिएके लिए जैन बैंक की स्थापना हुई

मुरैना में साधर्मी बंधुओं के लिएके लिए जैन बैंक की स्थापना हुई

मुरैना‌ ! अर्थ के अभाव में किसी सजातीय परिवार के सपने अधूरे न रहें, उन्हें किसी गैर के आगे हाथ न फैलाना पड़े, इसकी पूर्ति के लिए जैन समाज के युवाओं ने अपनी खुद की बैंक खोल ली ।
जैन बैंक के संचालक अनिल जैन नायक बताते हैं कि मध्यम श्रेणी के परिवारों को समय-बे समय पैसों की अवश्यकता होती रहती है । समाज का कमजोर तबका तो छोटी मोटी जरूरतों के लिए धनाभाव के कारण सदैव ही परेशान रहता हैं । समाज के एक विशेष वर्ग को जब भी धन की अवश्यकता होती है, उसकी मदद के लिए कोई भी तैयार नहीं होता है । मजबूरी में वह सूदखोरों के चुंगल में फस जाता है और वह निरंतर कर्ज में डूबता जाता है । इन्ही सब बातों को दृष्टिगत रखते हुए अपनी खुद की बैंक खोलने का विचार मन में उत्पन्न हुआ । स्थानीय जैन समाज के लगभग 50 युवाओं के समूह ने आपस में चर्चा करके जैन बैंक का गठन किया ! जैन बैंक का प्रत्येक सदस्य हर माह 500/- रूपया या उससे अधिक राशि जमा करता है, जिसका उसे कोई ब्याज या अन्य लाभ नहीं दिया जाता । जैन समाज मुरेना के किसी भी व्यक्ति या परिवार को व्यापार, शादी, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास या अन्य किसी भी सद कार्य के लिए पैसों की आवश्यकता होने पर वह जैन बैंक से संपर्क कर लोन ले लेता है और धीरे धीरे वह अपनी सुविधानुसार उस लोन को वापिस कर देता है । अभी जैन बैंक शुरुआती दिनों में छोटे छोटे लोन ही स्वीकृत कर रही है, आगे आने वाले समय में यह बड़ी धन राशि के लोन भी स्वीकृत करने लगेगी ।
समाजिक अर्थ सहयोग की भावना के इस पुनीत कार्य में निरंतर लोग जुड़ रहे हैं । जैन बैंक के प्रारंभ में मात्र 10 लोग जुड़े थे लेकिन मात्र चार माह के अल्प समय में ही जैन बैंक के सदस्यों की संख्या 50 के लगभग हो गई है ।
मनोज जैन ‘नायक ‘ ✍🏻

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