इंदौर के जितेंद्र – मोनिका हर्ष जैन “जीरभार” परिवार ने 108 दिव्यांग बंधुओं और उनके साथियों को तीर्थराज सम्मेद शिखरजी के दर्शन करा कर अपने संस्कारों की मिसाल कायम की

इंदौर ! (देवपुरी वंदना) अपने कुल, परिवार, धर्म, समाज, संस्कार – संस्कृति सेवा परमो धर्म के सिद्धांत को साकार करते हुए इंदौर के समाजसेवी और आइरिस ग्रुप के संचालक जितेंद्र -मोनिका हर्ष जैन जीरभार परिवार ने एक अनूठी मिसाल पेश की है।
आपने विकलांग सेवाभावी संस्था नांदणी द्वारा आयोजित श्री सम्मेद शिखरजी तीर्थ यात्रा में शामिल 108 दिव्यांगों और उनके सहायकों का पूरा खर्च वहन करने का संकल्प लिया । जिसको साकार रूप विगत 5 से 15 अप्रैल 2026 तक सानंद सम्पन्न हुई, जिसमें 240 से अधिक यात्री शामिल हैं। यात्रा कोल्हापुर से शुरू होकर दिल्ली और हस्तिनापुर होते हुए 10 अप्रैल को शिखरजी पहुंचे जहां 11 अप्रैल को वंदना की। भरत जैन एवं श्री रेखा संजय इंदौर अनुसार जितेंद्र जैन को इस सेवा कार्य की प्रेरणा मंदिर और व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से मिली, जिसके बाद उन्होंने तुरंत सहयोग का निर्णय लिया।इस पुण्य कार्य के लिए उन्हें आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज, मुनिश्री 108 अर्पित सागर जी महाराज और अंतर्मुखी मुनिश्री 108 पूज्य सागर जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।यात्रा संघपति श्री जितेंद्र जैन ने चर्चा में बताया कि दिव्यांगों को यात्रा करने की प्रेरणा उन्हें वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री108 वर्धमान सागर जी के प्रवचन मैं सुना की प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने गृहस्थ अवस्था में 32 वर्ष की उम्र में सम्मेद शिखर जी की यात्रा में एक वृद्ध महिला को कंधे पर बैठ कर पूरे पहाड़ की वंदना कराई थी तथा राजगृही में भी श्री सातगौड़ा ने वृद्ध पुरुष को पहाड़ की वंदना कराई थी इस प्रवचन से प्रेरित होकर इन्होंने समाज के विकलांग समाज जनों को यात्रा करने का मानस बनाया।
पिछले 14 वर्षों से दिव्यागों की सेवा कार्यरत संस्था ने उनके इस योगदान को प्रेरणादायक बताते हुए आभार व्यक्त किया है।
राजेश पंचोलिया इंदौर✍🏻
