अष्टापद-बद्रीनाथ सिद्ध क्षेत्र में 23 अप्रैल से खुलेंगे पावन कपाट उत्तराखंड राजकीय अतिथि सजग साधिका आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमती माताजी के सानिध्य में ऐतिहासिक आयोजन

उत्तराखंड | (देवपुरी वंदना) हमारे आराध्य प्रथम तीर्थंकर की निर्वाण भूमि श्री 1008 दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र अष्टापद-बद्रीनाथ, उत्तराखंड में 23 अप्रैल 2026 से पावन कपाट खुलने जा रहे हैं। यह शुभ अवसर उत्तराखंड राजकीय अतिथि सजग साधिका प. पू. आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्ण मती माताजी के पावन सानिध्य में संपन्न होगा। कपाट खुलने के साथ ही यह क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए शरद पूर्णिमा तक दर्शन हेतु खुला रहेगा।
श्री1008 दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र अष्टापद-बद्रीनाथ के अध्यक्ष आदित्य कासलीवाल और महामंत्री कीर्ति पांड्या ने बड़े उत्साह पूर्वक बताया कि प्रति वर्षानुसार यहां ऐतिहासिक आयोजन जैन समाज के लिए अत्यंत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। अष्टापद क्षेत्र को आराध्या प्रथम तीर्थंकर 1008 भगवान आदिनाथ की निर्वाण भूमि माना जाता है, जहां उनकी स्मृति में भव्य सिद्ध क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। आयोजन आयोजन के अंतर्गत श्रद्धालुओं को तीर्थंकरों के चरण वंदना पूजन-अर्चना और आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर प्राप्त होगा। देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है, जिन के लिए प्रशासन एवं ट्रस्ट द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।
पूर्णमति माताजी का जीवन परिचय
पूर्व का नाम :- बाल ब्रह्मचारिणी वीणा जी
पिता का नाम : श्री अमृतलाल जी जैन (समा. मुनि 108 श्री हेमंत सागर जी)
माता का नाम : श्रीमती रुक्मणी बाई जी जैन
भाई – के नाम
श्री राजेन्द्र ,श्री अशोक,
श्री अकलंक
जन्म/ दिनांक/तिथि (राजस्थान)
06/05/1962 रविवार अक्षय तृतीया डूंगरपुर
शिक्षा (लौकिक/धार्मिक) :
हायर सेकेण्डरी
ब्रह्मचर्य व्रत दिनांक जी से)
1967, जबलपुर मे (आचार्य श्री शिवसागर
दस प्रतिमा 1983 मे (आहार जी टीकमगढ़)
आर्यिका दीक्षा दिनांक वी.सं. 2046, श्री दिग.
07/ 08/19998 श्रावण शुक्ला 6 मंगलवार,
दिन/तिथि/स्थान :
जैन अतिशय क्षेत्र कुण्डलपुर जी जिला दमोह मध्य प्रदेश
दीक्षा गुरु : आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज
प्रमुख विशेष :आपकी सीधी आर्यिका दीक्षा हुई | आपके सानिध्य मे अनेक विधान, शिविर, मंदिर शिलान्यास, वेदी प्रतिष्ठा आदि कार्य हुए | आपने अनेक विधान, पूजन, भजन, स्तुति आदि की रचना की एवं अनेक कृतियों का सृजन किया
इस पावन आयोजन के साथ ही अष्टापद क्षेत्र में निर्माण कार्यों का भी प्रसन्न निलय (अतिथि भवन).का शुभारंभ किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में यह स्थान एक प्रमुख जैन तीर्थ के रूप में स्थापित हो सके।
आयोजन से जुड़े ट्रस्ट पदाधिकारियों ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस आध्यात्मिक अवसर का लाभ लें और धर्म-आराधना में सहभागी बनें।
विस्तृत जानकारी के लिए संपर्क करें मोबाइल नंबर : – 9425053439,9826768140,6264940717
