इंदौर दिगंबर जैन समाज चुनाव परिणाम आए 10 दिन बीत गए, लेकिन सवाल वहीं खड़ा है— इंदौर दिगंबर जैन समाज का असली अध्यक्ष कौन ?

 

इंदौर ! (देवपुरी वंदना) जैन समाज का हृदय स्थल कह लाने वाला इंदौर दिगंबर जैन समाज कुछ चंद व्यक्ति नाम, पद, मंच, माला, के लालची महत्वाकांक्षी व्यक्ति इंदौर दिगंबर जैन समाज की भोजन प्रिय समाज बंधु को लेकर अपनी मनमानी विगत कई वर्षों से करते आ रहे हैं जिसका परिणाम प्रत्यक्ष रूप से स्थानीय जिन समाज के साथ-साथ विभिन्न प्रांतो की जैन समाज भी देख रही है मगर उन पर कोई असर नहीं हो रहा वह सिर्फ इंदौर तक ही सीमित रहते हैं वह भी अपनी समाज के अंदर उनमें से कोई भी नगर निगम से लेकर विधानसभा सांसद तक का सफर नहीं कर पाए और न कर पाएंगे क्योंकि उनकी संकुचित विचारधारा यहीं तक सीमित रहकर रह जाती है ! विगत 15 मार्च को प्रजातांत्रिक प्रणाली से परिणाम आए फिर भी जिन्हें नाम,पद की लालसा है वही इस निर्णय असंतुष्ट नजर आ रहे हैं क्योंकि जिन्हें पद मिला अब वह चिंतित है कि शक्ति प्रदर्शन का
दिन याने महावीर जन्म कल्याण महोत्सव पर्व नजदीक है
जो बाद में अध्यक्ष बने उन्होंने दो दिन पूर्व सम्मान समारोह में घोषणा कर दी की महावीर जन्म कल्याण महोत्सव के बाद ही में शपथ लूंगा ! अब देखना यह है कि प्रजातांत्रिक तरीके से हुए चुनाव के अध्यक्ष ने किस बात से समझौता कर यह निर्णय लिया ? खैर अब यह तो उनका निर्णय है कि किस आधार पर या कौन सी मजबूरी में उन्हें समय पर शपथ लेने से रोके रखा क्योंकि विगत कई वर्षों से दो अध्यक्ष दो अध्यक्ष को लेकर समाज को फुटबॉल बनाया जा रहा था इसका फायदा अंपायर खुद कप्तान बन गए उसके बाद हुए चुनाव में कप्तान के पदाधिकारी झुंड बनाकर नए अपने झुंड का साथी बनाकर अध्यक्ष को अपने साथ कर लिया जो खुले रूप से प्रजातांत्रिक तरीके से अध्यक्ष बने वह भी इंदौर शहर के 133 मंदिरों के 634 मंदिर प्रतिनिधियों का विश्वास ताक में रख कर…?
माना वह भी झुंड का हिस्सा बनकर अध्यक्ष की कुर्सी के हकदार बने हैं इंदौर दिगंबर जैन समाज यही प्रश्न लेकर दबी जबान में अपने साथियों के बीच व्हाट्सएप – व्हाट्सएप खेल रहे हैं जो खुलकर नहीं कह पा रहे हैं वह पत्रकारों को जानकारी देखकर अपनी बात समाज तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं
प्राय: देखा जाए तो इंदौर दिगंबर जैन समाज (सामाजिक संसद) के अध्यक्ष और पदाधिकारीयो का महत्व भी महावीर जन्म कल्याण महोत्सव पर्व और क्षमावाणी पर्व पर ही होता आ रहा है अभी तक देखने में यही आया  है अब देखना यह है‌ कि वर्ष भर कोई गतिविधि चलती है या नहीं ?

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