यूं तो हम आए दिन देश में भ्रष्टाचार, घोटाले और रिश्वतखोरी के मामले सुनते हैं मगर क्या हो जब हमारे स्वास्थ्य लाभ या (कोरोना काल) के समय हम जिन्हें भगवान मानते है वही डॉक्टर जब रिश्वतखोरी के दौर से गुजरे तब क्या हुआ होगा। आओ समझे दिल को छूने वाली मार्मिक व्यथा जो कि सागर मध्य प्रदेश के निवासी प्रोफेसर डॉक्टर सर्वेश जैन द्वारा देश के प्रधानमंत्री से की गई गुहार के रूप में …
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, श्री नरेंद्र भाई मोदी भारत सरकार
(एक भुक्त भोगी का स्वकथन) विषय- हिंदुस्तान के छोटे शहरों और देहातों की जमीनी हकीकत बताने बाबद । महोदय जी,
मेरे स्वर्गीय पिता का सपना था की, सागर शहर में मेरा अपना एक भूखंड हो, जिस पर मैं अपनी वेतन और नियमानुसार की गई प्राइवेट प्रैक्टिस से, एक मकान बनवा सकूं जो मेरे शासकीय सेवा से निवृत होने पर (या निकाले जाने पर ), मेरा आसरा बने ।
इसके लिए मैने एक भूखंड क्रय किया, लेकिन इतनी सारी खिड़कियां पर और इतनी सारी फीस और रिश्वत के बाद, मेरा सारा उत्साह और देशभक्ति काफूर हो गई ।
महोदय, रजिस्ट्री करवाने गए तो स्टांप और फीस के अलावा एक “ऑफिस खर्चा” नाम से हस्तलिखित पर्ची मिल गई जिस पर दी जाने वाली रिश्वत का ब्यौरा था। वहां से फ्री होने पर नामांतरण के दो बार दस दस हजार रुपए देने पढ़े ।
तत्पश्चात डायवर्सन में तकरीबन एक लाख रुपए लगे, जिसमे से पचास हजार रुपए रेडक्रास सोसायटी की रसीद के नाम पर लिए गए। अब नक्शा पास करने में एक लाख दस हजार की रिश्वत मांगी जा रही है (पचपन हजार रुपए जिसकी की रसीद मिलेगी, वह अलग से )
महोदय, उक्त नाटक पिछले दो तीन बरस के दौरान हुआ, मेरी समझ यह कहती है की इस प्रकरण में दोषी है, हमारी व्यवस्था क्योंकि यह सारे कार्य आज कंप्यूटर के दौर में सिंगल विंडो पर होना चाहिए, ताकि भ्रष्टाचार कम हो और आम आदमी को फीस या रिश्वत जो भी देना है वो एक ही जगह पर, एक बार में लिया जाए।
महोदय जी इस चिट्ठी के बाद मुझसे उक्त आरोपों के सबूत मांगे जाएंगे, लेकिन क्या यह सबूत ही पर्याप्त नहीं की उक्त कथन में वर्णित सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों के व्यक्तिगत संपत्ति आप से ज्यादा होगी ?
लोकायुक्त या आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से कोई उम्मीद करना बेकार है क्योंकि वो आम आदमी को परेशान करने में ज्यादा रुचि लेती हैं बजाएं भ्रष्टाचार को उसके उद्गम स्थल से खत्म करने में महोदय, इस स्वतंत्रता दिवस पर आपको सच्चाई से अवगत कराने को ही मैं सच्ची देशभक्ति मानता हूं ।
आपका प्रो. डॉ. सर्वेश जैन बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर मध्य प्रदेश